Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 Sep, 2026 04:28 PM

सोशल मीडिया पर सरकारी बैंकों के मर्जर को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने 9 सरकारी बैंकों को तीन बड़ी यूनिट में मर्ज करने का आदेश जारि किया है। हालांकि प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की...
नई दिल्लीः सोशल मीडिया पर सरकारी बैंकों के मर्जर को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने 9 सरकारी बैंकों को तीन बड़ी यूनिट में मर्ज करने का आदेश जारि किया है। हालांकि प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने इस दावे को फर्जी बताया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किए जा रहे कुछ दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया गया है, जिससे वे वित्त मंत्रालय की ओर से जारी भारत सरकार के आधिकारिक राजपत्र (Gazette) जैसे दिखाई देते हैं। वायरल दस्तावेज में दावा किया गया है कि सरकार ने सरकारी बैंकों के एक बड़े विलय को मंजूरी दे दी है।

वायरल दस्तावेज में क्या दावा किया गया?
फर्जी अधिसूचना में दावा किया गया है कि इंडियन बैंक (Indian Bank), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में मिलाकर नया SBI Group बनाया जाएगा। इसमें यह भी दावा था कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को पंजाब नेशनल बैंक में मर्ज किया जाएगा, जबकि केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में शामिल किया जाएगा।
PIB ने दावे को बताया फर्जी
PIB Fact Check ने वायरल अधिसूचना को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा यह दस्तावेज फर्जी है। PIB के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
यह फर्जी दस्तावेज मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर शेयर होने के बाद एक्स (पूर्व में Twitter) पर भी चर्चा में आया। इससे बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच सरकारी बैंकों के नए मर्जर को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
2019 में हुआ था बड़ा PSU बैंक मर्जर
वायरल दावा इसलिए भी लोगों को वास्तविक लग सकता है क्योंकि भारत में पहले बड़े पैमाने पर सरकारी बैंकों का विलय हो चुका है। 2019 में केंद्र सरकार ने 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर चार बड़ी बैंकिंग इकाइयां बनाने का फैसला किया था। इसके बाद देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी।
इसी वास्तविक घटनाक्रम का हवाला देकर समय-समय पर बैंक मर्जर से जुड़े फर्जी दावे सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाते रहे हैं।