ATM Money Exchange: छुट्टे की टेंशन खत्म, मनी एक्सचेंजर बनेगा ATM

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 01:20 PM

no more worries about loose change atm money exchanger

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि जेब में ₹500 का नोट तो था लेकिन चाय की टपरी या ऑटो वाले के पास छुट्टा नहीं था और आप बेबस महसूस हुए? भारत में बड़े नोट रखना गर्व की बात हो सकता है लेकिन उसे इस्तेमाल करना अक्सर सिरदर्द बन जाता है। अब इस परेशानी का...

बिजनेस डेस्कः क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि जेब में ₹500 का नोट तो था लेकिन चाय की टपरी या ऑटो वाले के पास छुट्टा नहीं था और आप बेबस महसूस हुए? भारत में बड़े नोट रखना गर्व की बात हो सकता है लेकिन उसे इस्तेमाल करना अक्सर सिरदर्द बन जाता है। अब इस परेशानी का हाई-टेक समाधान केंद्र सरकार तैयार कर रही है।

सरकार देशभर में ‘हाइब्रिड एटीएम’ लगाने पर विचार कर रही है, जो न केवल पैसे निकालेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर बड़े नोटों को छोटे नोटों में एक्सचेंज भी कर सकेंगे। इन मशीनों में ₹10, ₹20 और ₹50 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोट उपलब्ध होंगे।

मुंबई में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट

एक रिपोर्ट के अनुसार, इन मशीनों का परीक्षण मुंबई में शुरू कर दिया गया है। इन्हें बाजार, रेलवे स्टेशन, बस डिपो, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों जैसी जगहों पर लगाया जाएगा, जहां नकदी का उपयोग ज्यादा होता है।

हालांकि डिजिटल लेन-देन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन आज भी लाखों लोग नकदी पर निर्भर हैं- जैसे दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले और रोजाना सफर करने वाले। उनके लिए ₹10-₹20 का छुट्टा न होना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका में रुकावट बन जाता है।

RBI की तैयारी और नकदी सर्कुलेशन

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इस दिशा में सक्रिय है। वह छोटे नोटों की छपाई बढ़ाने पर विचार कर रहा है ताकि मशीनों में कैश की कमी न हो। यह पहल नकदी को खत्म करने के लिए नहीं है, बल्कि इसे स्मार्ट तरीके से सर्कुलेशन में लाने के लिए है।

चुनौतियां और सवाल

हालांकि यह योजना लाभकारी है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।

  • क्या बैंक इन मशीनों के रख-रखाव और सुरक्षा खर्च उठाने के लिए तैयार होंगे?
  • क्या सिर्फ मशीनें लगा देने से नोटों की सप्लाई असंतुलन खत्म हो जाएगा?

जहां एक तरफ UPI और डिजिटल पेमेंट ने क्रांति ला दी है, वहीं दूसरी तरफ यह ‘हाइब्रिड’ नकदी व्यवस्था उन लोगों के लिए सेतु का काम करेगी, जो आज भी कैश को प्राथमिकता देते हैं।

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