Fastag Rule Change : Fastag में होने जा रहा बड़ा बदलाव, आपको भी भरना पड़ सकता है भारी जुर्माना

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 10:34 PM

now heavy fines will be imposed even if you have a fastag

देशभर में नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए अब टोल नियम पहले से ज्यादा कड़े हो गए हैं। केंद्र सरकार ने टोल वसूली व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नेशनल हाईवे फीस नियम, 2026 में संशोधन किया है। यह नए प्रावधान 17 मार्च 2026...

नेशनल डेस्क : देशभर में नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए अब टोल नियम पहले से ज्यादा कड़े हो गए हैं। केंद्र सरकार ने टोल वसूली व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नेशनल हाईवे फीस नियम, 2026 में संशोधन किया है। यह नए प्रावधान 17 मार्च 2026 से लागू हो चुके हैं, जिनका सीधा असर लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा।

सरकार ने टोल प्लाजा के नियमों में एक नया शब्द 'अनपेड यूजर फीस' जोड़ा है, जिसका मतलब है कि अगर आपके पास फास्टैग है, लेकिन उसमें पूरा बैलेंस नहीं है तो भी आपको जुर्माना भरना पड़ेगा। बता दें कि आपको नियमित समय तक जुर्माना भरना पड़ेगा नहीं तो आपका जुर्मान दोगुना हो जाएगा।

बिना भुगतान निकलने पर मिलेगा ई-नोटिस

सरकार ने अब टोल भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों पर नजर रखने के लिए ई-नोटिस सिस्टम शुरू किया है। यदि कोई वाहन टोल प्लाजा से बिना भुगतान के गुजरता है या ट्रांजैक्शन अधूरा रह जाता है, तो वाहन मालिक को तुरंत डिजिटल माध्यम से नोटिस भेजा जाएगा। यह नोटिस एसएमएस, ईमेल या मोबाइल ऐप के जरिए मिल सकता है, जिसमें पूरी लेनदेन जानकारी दर्ज होगी।

72 घंटे में भुगतान नहीं तो दोगुना जुर्माना

नए नियमों के अनुसार, वाहन मालिक को बकाया टोल चुकाने के लिए 72 घंटे का समय दिया जाएगा। इस अवधि के भीतर भुगतान करने पर केवल मूल टोल राशि ही देनी होगी। लेकिन तय समय सीमा पार होते ही यह रकम दोगुनी हो जाएगी, जिससे लापरवाही करना महंगा साबित होगा।

15 दिन बाद सेवाओं पर लग सकती है रोक

अगर कोई वाहन मालिक 15 दिनों तक बकाया राशि नहीं चुकाता और कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं करता, तो यह जानकारी सरकारी वाहन डेटाबेस में दर्ज कर दी जाएगी। इसके बाद उस वाहन से जुड़ी कुछ जरूरी सेवाओं पर रोक लगाई जा सकती है, जब तक कि बकाया राशि का भुगतान न कर दिया जाए।

गलत नोटिस पर शिकायत का विकल्प

सरकार ने वाहन मालिकों को राहत देते हुए शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी दी है। यदि किसी को लगता है कि नोटिस गलती से भेजा गया है, तो वह 72 घंटे के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। अधिकारियों को पांच दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा।

डिजिटल टोल सिस्टम को मजबूत करने की पहल

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य टोल वसूली प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और राजस्व नुकसान को रोकना है। भविष्य में बैरियर-फ्री और जीपीएस आधारित टोल सिस्टम को लागू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिसमें यह नया ई-नोटिस सिस्टम अहम भूमिका निभाएगा।

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