Onion price: प्याज कीमतों में 25% का इजाफा, सितंबर की बारिश पर टिकी आगे की कीमतें

Edited By Updated: 14 Aug, 2026 11:10 AM

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Onion price: प्याज की बढ़ती कीमतें फिर रुलाने लगी हैं। देश की बड़ी मंडियों में शुमार लासलगांव में पिछले हफ्ते प्याज की थोक कीमतों में 25 फीसदी की तेजी आई है। बुधवार को लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी में प्याज का औसत भाव बढ़कर 27

Onion price: प्याज की बढ़ती कीमतें फिर रुलाने लगी हैं। देश की बड़ी मंडियों में शुमार लासलगांव में पिछले हफ्ते प्याज की थोक कीमतों में 25 फीसदी की तेजी आई है। बुधवार को लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी में प्याज का औसत भाव बढ़कर 27 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि 5 अगस्त को यह 21.50 रुपए प्रति किलोग्राम था। अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत भी 24 रुपए से बढ़कर 30 रुपए प्रति किलोग्राम पहुंच गई।

कीमतों में इस तेजी के बीच केंद्र सरकार सितंबर के पहले सप्ताह से बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखना और बाजार में आपूर्ति बढ़ाना है। हालांकि, इस साल सरकार द्वारा न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य में सात बार बढ़ोतरी के बावजूद करीब 2 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले प्याज की खरीद लगभग 25 फीसदी कम रहने का अनुमान है।

खरीफ फसल में देरी से बढ़ी चिंता

व्यापारियों के मुताबिक दक्षिण भारत से आने वाली खरीफ प्याज की फसल में देरी हो रही है। महाराष्ट्र में मानसून देर से पहुंचने के कारण खरीफ की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे नासिक क्षेत्र से नई फसल की आवक भी देर से होने की संभावना है।

फिलहाल देश में प्याज की आपूर्ति मुख्य रूप से मार्च-अप्रैल में भंडारित की गई रबी फसल से हो रही है। यह अक्टूबर तक बाजार का प्रमुख स्रोत रहती है। इसके साथ कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आने वाली शुरुआती खरीफ फसल आपूर्ति को सहारा देती है। अक्टूबर के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से खरीफ प्याज की बड़ी आवक शुरू होती है।

सितंबर का मौसम होगा निर्णायक

महाराष्ट्र के प्याज निर्यातक दानिश शाह के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना कम है और बाजार स्थिर रह सकता है। हालांकि, सितंबर का मौसम आगे की कीमतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

अगर सितंबर में भारी बारिश से दक्षिण भारत की नई फसल प्रभावित होती है, तो प्याज की कीमतों पर फिर से तेजी का दबाव बन सकता है। वहीं, मौसम अनुकूल रहा और अच्छी गुणवत्ता वाली फसल बाजार में पहुंची, तो आपूर्ति सुधरने से कीमतों पर नियंत्रण बना रह सकता है।

व्यापारियों का कहना है कि रबी प्याज के उत्पादन और भंडारण में बड़ी कमी नहीं है लेकिन इस साल खराब मौसम का असर फसल की गुणवत्ता पर पड़ा है। इसका असर केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक प्याज बाजार में भी देखने को मिल रहा है। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में सरकारी बफर स्टॉक की बिक्री से कीमतों को राहत मिल सकती है लेकिन सितंबर में मौसम और दक्षिण भारत से खरीफ प्याज की आवक यह तय करेगी कि बाजार में तेजी आगे जारी रहती है या कीमतें स्थिर होती हैं।

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