Edited By Tanuja,Updated: 20 Apr, 2026 01:58 PM

नेपाल में तुर्की दूतावास खोलने को लेकर विवाद गहराया है। Lucky Bisht ने इसे सुरक्षा खतरा बताया, जबकि आधिकारिक स्तर पर इसे कूटनीतिक पहल माना जा रहा है। Nepal-India संबंधों और क्षेत्रीय संतुलन पर असर को लेकर बहस तेज हो गई है।
Kathmandu: नेपाल में तुर्की का दूतावास खोलने की खबर के बाद बवाल मच गया है। पाकिस्तान और फिलीस्तीन जैसे देशों में लश्कर और हमास जैसे आंतकवादी संगठनों को स्पोर्ट देने वाला देश तुर्की नेपाल में अपना दूतावास खोलने जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो हिंदू बाहुल देश नेपाल में कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा जिससे भारत को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है । ये दावा पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर किया है। लक्की बिष्ट का कहना है कि यह सिर्फ कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति भी हो सकती है। लक्की बिष्ट का मानना है कि नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है।
RAW एजेंट के अनुसार अगर तुर्की की एंबेसी नेपाल में खुलती है, तो यह सिर्फ कूटनीति नहीं होगी यह धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का दरवाज़ा होगा। क्योंकि इतिहास गवाह है कि तुर्की ने उन संगठनों को समर्थन दिया है जो समाज में विभाजन और हिंसा फैलाते रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह तुर्की ही था जिसने इस्माइल हानियेह को VIP पासपोर्ट दिया। जब ISIS अपने चरम पर था तब तुर्की ने जिहादियों के लिए रास्ते खोले, और इसने सीरिया को तबाह करने में भी भूमिका निभाई है।अगर आज नेपाल में यह तुर्की दूतावास खुलता है, तो इसके पीछे छिपे एजेंडे को समझना बेहद ज़रूरी है। यह नेपाल की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके अस्तित्व पर सीधा हमला होगा। तुर्की के भारत के साथ रिश्ते पहले से ही बहुत मजबूत नहीं रहे हैं। तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठा चुके हैं, जिसे भारत अपने आंतरिक मामले के रूप में देखता है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है।
इसके अलावा भारत के पड़ोसी आंतकिस्तान यानि पाकिस्तान के साथ भी तुर्की के गहरे संबंध हैं। दोनों देश रक्षा और कूटनीति में एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और कई मुद्दों पर एक जैसी स्थिति रखते हैं। इसी वजह से भारत को शक है कि तुर्की का रुख पाकिस्तान के पक्ष में झुका हुआ हो सकता है। 2025 में भारत द्वारा चलाए गए Operation Sindoor के दौरान भी तुर्की ने भारत की पीठ में छुरा घोंपा था पाकिस्तान को अपने ड्रोन देकर फुल समर्थन किया था जिससे भारत-तुर्की रिश्तों में दरार गहरी हो गई। अब अगर तुर्की नेपाल में अपनी मौजूदगी बढ़ाता है, तो इसका असर India और Nepal के रिश्तों पर पड़ सकता है।
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, गहरी सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में किसी तीसरे देश की सक्रियता को भारत सावधानी से देखता है। राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण प्रसाद दाहाल और तुर्की की संसद ग्रैंड नेशनल असेंबली के अध्यक्ष नुमान कुर्तुलमुस के बीच शिष्टाचार भेंट नेपाल में तुर्की का दूतावास स्थापित करने पर बातचीत हुई है । अध्यक्ष दाहाल ने कहा कि वर्तमान में तुर्की से संबंधित सभी कार्यों के लिए नेपालियों को दिल्ली जाना पड़ता है इसलिए नेपाल में तुर्की दूतावास की स्थापना से दोनों देशों के बीच सहयोग में आसानी होगी।