मिडल ईस्ट जंग में ट्रंप को सबसे बड़ा झटका, UAE ने दिखा दिया ठेंगा ! बोला-'हमें अमेरिका की जरूरत नहीं'

Edited By Updated: 20 Apr, 2026 07:42 PM

uae no longer needs america  call to close us military bases grows after iran

United Arab Emirates में United States के साथ रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक विश्लेषक के बयान के बाद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और डॉलर आधारित तेल व्यापार पर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

International Desk: मिडिल ईस्ट  जंग के बीच संयुक्त अरब अमीरात  (UAE) और संयुक्त राज्य अमेरिका(USA) के बीच संबंधों को दरार बहुत गहरी हो  गई है। यह खुलासा तब  प्रमुख एमिराती विश्लेषक अब्दुल खालिक अब्दुल्ला के बयान से हुआ है। उन्होंने कहा कि UAE को अब अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब सुरक्षा के बजाय एक “बोझ” बन सकते हैं।

 

हालांकि यह उनका व्यक्तिगत मत है और UAE सरकार की आधिकारिक नीति नहीं मानी जा रही है। विश्लेषक का तर्क है कि हाल के हमलों और खतरों के बीच UAE ने अपनी रक्षा क्षमता मजबूत की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की ओर से आए ड्रोन और मिसाइल खतरों को रोककर UAE ने दिखाया है कि वह अपनी सुरक्षा खुद संभाल सकता है। इसी कारण कुछ लोग अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर पुनर्विचार की बात कर रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी एक बड़ा मुद्दा सामने आया है।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर युद्ध या संकट की वजह से डॉलर की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो UAE तेल व्यापार के लिए अन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है। इसमें चीन की मुद्रा युआन का नाम सामने आया है।  दशकों से खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच एक समझ बनी हुई थी, जिसमें अमेरिका सुरक्षा देता था और बदले में तेल का व्यापार डॉलर में होता था। अब अगर इस व्यवस्था में बदलाव आता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों पर पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में  चीन का नाम भी सामने आ रहा है। अगर भविष्य में युआन में तेल व्यापार बढ़ता है, तो इससे चीन की वैश्विक भूमिका और मजबूत हो सकती है।  
 

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