Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Sep, 2026 01:32 PM

गोल्ड लोन यानी सोने के बदले कर्ज देने के कारोबार में बड़े प्राइवेट बैंकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। मजबूत ग्रोथ, आकर्षक रिटर्न और ग्राहकों के बीच बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए बड़े निजी बैंक खास तौर पर ज्यादा रकम वाले गोल्ड लोन सेगमेंट में...
नई दिल्लीः गोल्ड लोन यानी सोने के बदले कर्ज देने के कारोबार में बड़े प्राइवेट बैंकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। मजबूत ग्रोथ, आकर्षक रिटर्न और ग्राहकों के बीच बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए बड़े निजी बैंक खास तौर पर ज्यादा रकम वाले गोल्ड लोन सेगमेंट में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संगठित गोल्ड लोन बाजार में प्राइवेट बैंकों की मौजूदगी पहले सीमित रही है। इसकी बड़ी वजह इस कारोबार को शुरू करने के लिए होने वाला शुरुआती निवेश है। गोल्ड लोन कारोबार के लिए विशेष शाखाएं, प्रशिक्षित गोल्ड वैल्यूअर, सुरक्षित वॉल्ट और अलग ऑपरेटिंग सिस्टम की जरूरत होती है। इसके चलते दूसरे रिटेल लोन प्रोडक्ट्स की तुलना में इस कारोबार में निवेश की भरपाई होने में ज्यादा समय लगता है।
ग्रामीण बाजार में NBFC और सरकारी बैंकों की पकड़
गोल्ड लोन NBFCs और सरकारी बैंकों को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में मजबूत नेटवर्क का फायदा मिलता है। इन संस्थानों के पास व्यापक ब्रांच नेटवर्क, तेज लोन प्रोसेसिंग, आसान दस्तावेजी प्रक्रिया और स्थानीय ग्राहकों के साथ पुराने संबंध हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, NBFCs ऐसे ग्राहकों को भी लोन उपलब्ध कराते हैं जो पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के सामान्य क्रेडिट मानकों पर खरे नहीं उतर पाते। हालांकि, गोल्ड लोन कारोबार में तेज वृद्धि, बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न, कम क्रेडिट लागत और ग्राहकों की बढ़ती स्वीकार्यता ने बड़े प्राइवेट बैंकों को इस सेगमेंट में विस्तार के लिए प्रेरित किया है।
खास ब्रांच और डिजिटल चैनल पर जोर
बड़े निजी बैंक अब गोल्ड लोन कारोबार के लिए अलग शाखाएं, विशेषज्ञ टीम, डिजिटल सोर्सिंग और ऑटोमेशन जैसी सुविधाओं पर निवेश बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले समय में इससे खासकर शहरी और बड़े टिकट वाले गोल्ड लोन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेज होगी।
हालांकि, ग्रामीण बाजार में स्पेशलाइज्ड गोल्ड लोन NBFCs की पकड़ फिलहाल मजबूत रहने की उम्मीद है। तेजी से लोन मिलने, ज्यादा लचीलापन और बेहतर सर्विस चाहने वाले ग्राहकों के बीच NBFCs को बढ़त मिल सकती है।
HDFC Bank से RBL Bank तक तेजी से बढ़ा गोल्ड लोन पोर्टफोलियो
प्राइवेट बैंकों के गोल्ड लोन कारोबार में विस्तार के संकेत उनके लोन पोर्टफोलियो से भी मिल रहे हैं।
- HDFC Bank का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो FY26 में सालाना आधार पर 34% बढ़कर ₹23,700 करोड़ हो गया। जून 2026 तक यह 8% तिमाही बढ़त के साथ ₹25,500 करोड़ पहुंच गया।
- Axis Bank का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो FY26 में 23% बढ़कर ₹13,300 करोड़ हो गया।
- IDFC First Bank का गोल्ड लोन बुक FY26 में 79% बढ़कर ₹3,900 करोड़ रहा और जून 2026 तक बढ़कर ₹4,900 करोड़ पहुंच गया।
- AU Bank का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो दोगुने से ज्यादा बढ़कर FY26 में ₹3,900 करोड़ और जून में ₹4,500 करोड़ हो गया।
- RBL Bank का गोल्ड लोन बुक FY25 के ₹400 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹4,300 करोड़ हो गया।
- Bandhan Bank का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 57% बढ़कर ₹3,000 करोड़ पहुंच गया।
NBFCs भी बढ़ा रहे कारोबार
रिपोर्ट में कहा गया है कि डायवर्सिफाइड NBFCs भी इस बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकते हैं। Bajaj Finance का गोल्ड लोन बुक पिछले तीन वर्षों में 86% के CAGR से बढ़कर जून 2026 तक ₹21,000 करोड़ पहुंच गया है। कंपनी ने मार्च 2027 तक इसे ₹30,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य बताया है।
FY26-FY28 में 28% CAGR से बढ़ सकता है गोल्ड लोन बाजार
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, FY26 से FY28 के बीच भारत का कुल गोल्ड लोन उद्योग करीब 28% CAGR की दर से बढ़ सकता है। इस दौरान बड़े प्राइवेट बैंकों और डायवर्सिफाइड NBFCs की बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में गोल्ड लोन बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। खासकर शहरी इलाकों और बड़े रकम वाले कर्ज में प्राइवेट बैंकों की मौजूदगी बढ़ने की संभावना है, जबकि ग्रामीण और छोटे टिकट वाले लोन में गोल्ड लोन NBFCs की पकड़ मजबूत रह सकती है।