Edited By jyoti choudhary,Updated: 31 Mar, 2026 11:22 AM

शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों और ब्रोकर्स के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े नए लोन नियमों को लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब ये नियम 1 अप्रैल की बजाय 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
बिजनेस डेस्कः शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों और ब्रोकर्स के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े नए लोन नियमों को लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब ये नियम 1 अप्रैल की बजाय 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
क्यों टाला गया फैसला?
RBI को बैंकों, ब्रोकर्स और इंडस्ट्री से फीडबैक मिला कि नए नियमों को लागू करने में कुछ दिक्कतें और कन्फ्यूजन हैं। सभी पक्षों से चर्चा के बाद केंद्रीय बैंक ने फिलहाल इन नियमों को टालने का फैसला लिया।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
जो निवेशक शेयरों के बदले बैंक से लोन लेते हैं, उनके लिए यह अहम अपडेट है। नए नियम लागू होने के बाद........
- शेयर, REIT और InvIT के बदले अधिकतम 1 करोड़ रुपए तक ही लोन मिलेगा
- IPO, FPO और ESOP में निवेश के लिए लोन सीमा 25 लाख रुपए होगी
इसका मतलब साफ है कि आगे बड़े स्तर पर उधार लेकर निवेश करना आसान नहीं रहेगा।
ब्रोकर्स को मिली राहत
ब्रोकर्स के लिए फिलहाल कोई बड़ा झटका नहीं है। बैंक उनकी क्रेडिट लाइन जारी रख सकेंगे लेकिन भविष्य में फंडिंग के लिए 100% कैश या कैश जैसी सिक्योरिटी जरूरी होगी। इससे जोखिम नियंत्रण पर जोर रहेगा।
कंपनियों के लिए नए नियम
RBI ने अधिग्रहण (Acquisition Finance) से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए हैं—
- अब मर्जर और अमलगमेशन को भी अधिग्रहण फाइनेंस (acquisition finance) में शामिल किया गया है
- लोन तभी मिलेगा जब कंपनी किसी दूसरी कंपनी पर कंट्रोल हासिल कर रही हो
- अगर पैरेंट कंपनी किसी सब्सिडियरी के जरिए अधिग्रहण करती है, तो उसमें “सिनर्जी” दिखानी होगी।
इसके अलावा, अधिग्रहण के लिए लिए गए लोन का रीफाइनेंस तभी संभव होगा जब डील पूरी हो जाए, और नया लोन सिर्फ पुराने कर्ज को चुकाने के लिए इस्तेमाल होगा।
म्यूचुअल फंड्स को राहत
कुछ शॉर्ट-टर्म फंडिंग (जैसे G-Sec और T-Bills से मिलने वाला पैसा) को अब मार्केट एक्सपोजर में नहीं गिना जाएगा। इससे म्यूचुअल फंड्स के लिए लिक्विडिटी मैनेज करना आसान होगा।
क्या है बड़ा संकेत?
भले ही नियम 3 महीने के लिए टाले गए हैं लेकिन संकेत साफ है—RBI शेयर बाजार में बढ़ते जोखिम को नियंत्रित करना चाहता है। आने वाले समय में उधार लेकर निवेश करना मुश्किल होगा और बैंक भी ज्यादा सतर्कता से लोन देंगे।