Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Mar, 2026 01:13 PM

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बीते एक महीने में बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बीते एक महीने में बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
बीएसई सेंसेक्स 27 फरवरी के 81,287 अंकों के स्तर से गिरकर 27 मार्च को 73,583 पर आ गया यानी करीब 7,704 अंकों या 9.5 फीसदी की गिरावट। इस दौरान निवेशकों की संपत्ति में लगभग 41.4 लाख करोड़ रुपए की कमी आई है।
विदेशी निवेशकों ने बाजार से बनाई दूरी
एनएसडीएल और बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भी बाजार से दूरी बना ली है और करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए की निकासी की है, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
इस अवधि में सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन भी मिला-जुला रहा। टेक महिंद्रा और सन फार्मा के शेयरों में सीमित बढ़त देखने को मिली, जबकि मारुति सुजुकी और बजाज फाइनेंस में दो अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी तेज गिरावट आई, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा। सरकार द्वारा पेट्रो-प्रोडक्ट निर्यात पर विंडफॉल टैक्स दोबारा लागू किए जाने से कंपनी के शेयरों पर दबाव बढ़ा।
गिरावट के पीछे कारण
बाजार की गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें बॉन्ड यील्ड में तेजी, पश्चिमी बाजारों से मिले कमजोर संकेत, रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता शामिल हैं। इन सभी कारकों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी बाधाएं बनी रहेंगी, तब तक बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर रणनीति बनाने की सलाह दी जा रही है।