रेपो दर में कटौती से घर के लिए कर्ज होगा सस्ता, मांग बढ़ेगी: रियल एस्टेट

Edited By Updated: 05 Dec, 2025 02:57 PM

repo rate cut will make home loans cheaper and boost demand real estate

जमीन, मकान के विकास से जुड़ी कंपनियों तथा विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि आरबीआई के नीतिगत दर में 0.25 कटौती करने से आवास ऋण सस्ता होगा और मकानों की मांग को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने वृहद आर्थिक स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते...

नई दिल्लीः जमीन, मकान के विकास से जुड़ी कंपनियों तथा विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि आरबीआई के नीतिगत दर में 0.25 कटौती करने से आवास ऋण सस्ता होगा और मकानों की मांग को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने वृहद आर्थिक स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को शुक्रवार को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया। रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने रेपो दर में कटौती को अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। 

उन्होंने कहा, "इस कटौती से नकदी में सुधार होगा और कई क्षेत्रों में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। रियल एस्टेट के लिए कम ब्याज दरें गृह ऋण को अधिक किफायती बनाती हैं जिससे मकान खरीदारों को समर्थन मिलता है और मांग बढ़ती है।'' जैन ने कहा कि रेपो दर में कटौती का सकारात्मक प्रभाव संबद्ध उद्योगों पर भी पड़ेगा, जिससे अधिक रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। क्रेडाई (कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा, "इस कदम से सकारात्मक बाजार धारणा को और मजबूती मिलेगी, कर्ज लागत कम होगी, ऋण वृद्धि को समर्थन मिलेगा और रियल एस्टेट सहित सभी क्षेत्रों में मांग को बढ़ावा मिलेगा।'' 

पटेल ने कहा, "चूंकि नकदी अब केंद्रीय बैंक के लिए मुख्य चिंता का विषय नहीं रही, इसलिए क्रेडाई को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 का समापन मजबूत रहेगा और सभी क्षेत्रों में आवासीय मांग में निरंतर गति बनी रहेगी।" रियल एस्टेट से जुड़ी सेवाएं देने वाली सीबीआरई के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया व अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, "कम मुद्रास्फीति के माहौल और उम्मीद से बेहतर जीडीपी वृद्धि के बीच आरबीआई के रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती का फैसला, अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ाने पर इसके ध्यान को दर्शाता है। इससे बैंक पिछली दरों में कटौती को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करने और वृद्धि को बढ़ावा देने वाले रुख अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।" 

उन्होंने कहा, "रियल एस्टेट के लिए, इससे मांग में तेजी आने और सभी क्षेत्रों में निवेश की धारणा मजबूत होने की उम्मीद है।" कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक एवं अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा, "थोड़े विराम के बाद आरबीआई ने रेपो दर में फिर 0.25 प्रतिशत की कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया है जो तीन वर्ष में सबसे कम है। उधार दरों में यह कमी और तटस्थ रुख जारी रहना...वैश्विक अनिश्चितताओं एवं रुपये में गिरावट के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती में विश्वास को दर्शाता है।" उन्होंने कहा, "रियल एस्टेट क्षेत्र, खासकर आवासीय क्षेत्र के लिए यह ब्याज दरों में कटौती त्योहारी मांग और प्रमुख निर्माण सामग्रियों पर जीएसटी के युक्तिसंगत बनाने से बनी गति पर आधारित है। कम उधारी लागत से खासकर किफायती एवं मध्यम आय वाले आवास क्षेत्रों में खरीदार की धारणा में और सुधार होगा...।'' 

सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लि. के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा, "यह कदम निश्चित रूप से समग्र आर्थिक वृद्धि की मौजूदा गति को समर्थन देगा जिससे मांग एवं निवेश गतिविधि को बल मिलेगी। पूर्व में रेपो दर में कटौती, केंद्रीय बजट में दी गई आयकर राहत और इस वर्ष की शुरुआत में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों को युक्तिसंगत बनाने के साथ न केवल गृह ऋण सस्ते हुए हैं, बल्कि मकान खरीदारों के लिए धारणा में भी उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।'' उन्होंने कहा, "इससे रियल एस्टेट क्षेत्र स्थिर वृद्धि की राह पर बढ़ रहा है। अब इस दर कटौती से बाजार की धारणा को और मजबूत करने, क्रय शक्ति बढ़ाने एवं प्रमुख क्षेत्रों में आवास मांग में निरंतर वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।'' अंसल हाउसिंग निदेशक कुशाग्र अंसल ने कहा, "रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नए साल से पहले बड़ा सकारात्मक संकेत है। ब्याज दरों में राहत से खरीदारी और तेज होने की संभावना है। डेवलपर और खरीदार दोनों इस फैसले को बाजार में नए उत्साह का संदेश मान रहे हैं।'' 

कृष्णा ग्रुप एवं क्रिसुमी कॉरपोरेशन के चेयरमैन अशोक कपूर ने कहा, "रेपो दर में कटौती भारत में वर्तमान निम्न मुद्रास्फीति के माहौल एवं स्थिर वृद्धि दृष्टिकोण के अनुरूप है। पिछले कुछ तिमाहियों में लक्जरी हाउसिंग खंड में अंतिम उपभोक्ता की ओर से मजबूत मांग देखी गई है...। कम ब्याज दरें उन ग्राहकों की घर खरीदने की क्षमता को और बढ़ाएंगी जो बेहतर तैयारी, एकीकृत सुविधाओं एवं दीर्घकालिक संपत्ति मूल्य प्रदान करने वाले उच्च-गुणवत्ता वाले मकानों में निवेश करना चाहते हैं। '' भूमि‍का ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक उद्धव पोद्दार ने कहा कि रेपा दर में कटौती आवासीय बाजार के लिए बिल्कुल सही समय पर आई है। साल के अंत में खरीदारों का रुझान वैसे ही बढ़ जाता है और अब आवास ऋण और भी सस्ते हो जाएंगे। 2026 की ओर बढ़ते हुए यह कम ब्याज दर से आवासीय बाजारों में ज्यादा स्थिरता आने की संभावना है।

निराला वर्ल्ड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुरेश गर्ग ने कहा, “ब्याज दर कम होने से मकान खरीदने वालों के लिए बड़ा फायदा होगा क्योंकि इससे ऋण सस्ता होगा। अब लोग आसानी से निर्णय ले पाएंगे और इसका सीधा असर परियोजनाओं की बिक्री और नई पेशकशों पर पड़ेगा। यह कदम केवल खरीदारों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।'' भूटानी ग्रुप के सीईओ आशीष भूटानी ने कहा, “रेपो दर में कटौती रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए वृद्धि को गति देने वाला साबित होगा। कम ब्याज दरें सीधे तौर पर ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता बढ़ाती हैं, अंतिम पंक्ति के ग्राहकों को मजबूत करती हैं और सभी खंडों में नए निवेश के अवसर खोलती हैं। यह कदम बाजार के लिए लोगों की भावनाओं को सकारात्मक दिशा देगा और हर क्षेत्र में वृद्धि को तेजी से आगे बढ़ाएगा।” साया ग्रुप के प्रबंध निदेशक विकास भसीन ने कहा, "आरबीआई के रेपो दर में कटौती अर्थव्यवस्था के लिए सही समय पर मिली बड़ी राहत है और यह वित्तीय स्थिति के आसान होने का साफ संकेत है। इससे कर्ज लेने वालों की ईएमआई कम होगी और उनके पास नकदी की स्थिति बेहतर होगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘घर खरीदारों के लिए यह कदम घर खरीदना और ज्यादा किफायती बनाएगा और उनकी खरीद क्षमता बढ़ाएगा। इससे कुल मिलाकर आवासीय मांग में एक बार फिर तेजी आने की उम्मीद है।''  

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