2026 के अंत तक रुपया 95 प्रति डॉलर के आसपास रहने की उम्मीदः रिपोर्ट

Edited By Updated: 06 May, 2026 12:38 PM

rupee expected to hover around 95 per dollar by end of 2026

अमेरिकी फिच समूह की कंपनी बीएमआई (BMI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया 2026 के अंत तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 95 रुपए के सीमित दायरे में बना रह सकता है। वर्तमान में रुपया लगभग 95.20 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। रिपोर्ट में...

Indian Rupee: अमेरिकी फिच समूह की कंपनी बीएमआई (BMI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया 2026 के अंत तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 95 रुपए के सीमित दायरे में बना रह सकता है। वर्तमान में रुपया लगभग 95.20 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका-ईरान संघर्ष, उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बना रहा है लेकिन भारत के मामले में यह गिरावट तेज नहीं होगी।

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल का प्रभाव

भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर रुपए पर पड़ता है। मार्च-अप्रैल 2026 में रुपया लगभग 4% कमजोर हुआ। बीएमआई का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.6% और मुद्रास्फीति 3.4% रह सकती है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत देती है लेकिन बाहरी दबाव जोखिम बने हुए हैं।

चालू खाता घाटा और पूंजी प्रवाह का दबाव

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी का 1.3% तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण ऊर्जा आयात पर निर्भरता और खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस में संभावित गिरावट है। 2025 में भारत के कुल रेमिटेंस का लगभग 38% हिस्सा खाड़ी देशों से आया था।

इसके साथ ही विदेशी निवेश प्रवाह में कमी और पूंजी की निकासी भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। मार्च में लगभग 13.4 अरब डॉलर की पूंजी निकासी दर्ज की गई, जो महामारी के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी मानी जा रही है।

RBI की भूमिका और बाजार स्थिरता

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है। अनुमान है कि आरबीआई आने वाली तिमाहियों में विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करेगा। पहले भी 2022 में ऐसे हस्तक्षेप देखे गए थे, जब डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट आई थी।

भविष्य का दृष्टिकोण

बीएमआई का मानना है कि नकारात्मक और सकारात्मक कारकों के संतुलन के कारण रुपया सीमित दायरे में रहेगा। हालांकि वैश्विक जोखिम, भू-राजनीतिक तनाव और पूंजी प्रवाह में अस्थिरता आने वाले समय में रुपए पर दबाव बनाए रख सकते हैं।
 

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