Edited By jyoti choudhary,Updated: 10 Jul, 2026 12:54 PM

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और घरेलू स्पॉट मार्केट में सुस्त डिमांड के बीच शुक्रवार को MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुएं गिरावट के साथ कारोबार करती दिखी। ऐसे माहौल में
बिजनेस डेस्कः वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और घरेलू स्पॉट मार्केट में सुस्त डिमांड के बीच शुक्रवार को MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुएं गिरावट के साथ कारोबार करती दिखी। ऐसे माहौल में बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और तय स्तरों पर ही खरीदारी या मुनाफावसूली की रणनीति अपनाने की सलाह दी है।
सोने में गिरावट के कारण
विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसकी प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, महंगाई बढ़ने की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है। फेड की जून बैठक के मिनट्स से संकेत मिले हैं कि नीति निर्माता महंगाई और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। वहीं, फेडवॉच टूल के अनुसार सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना अब 64 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने को महंगाई से बचाव का सुरक्षित निवेश माना जाता है लेकिन ऊंची ब्याज दरों के माहौल में इसकी चमक फीकी पड़ जाती है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। इसी बीच पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
एक्सपर्ट्स की सलाह
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के मुख्य अनुसंधान अधिकारी रवि सिंह के मुताबिक, जब तक सोना 1,40,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के ऊपर बना रहता है, तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है। वहीं, पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने निवेशकों को सप्ताहांत से पहले सोने और चांदी में बढ़त आने पर मुनाफावसूली करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी अनिश्चितता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।