Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Oct, 2026 03:50 PM

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि जीएसटी क्षेत्रीय अधिकारियों को अब कर मांग बढ़ाने के लिए 'धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयानबाजी या तथ्यों को छिपाने' से संबंधित कड़े जीएसटी कानून प्रावधानों को लागू करने से पहले करदाता की कर...
नई दिल्लीः केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि जीएसटी क्षेत्रीय अधिकारियों को अब कर मांग बढ़ाने के लिए 'धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयानबाजी या तथ्यों को छिपाने' से संबंधित कड़े जीएसटी कानून प्रावधानों को लागू करने से पहले करदाता की कर चोरी की मंशा को साबित करनी होगी।
सीबीआईसी ने एक परिपत्र में कहा कि कर चोरी की मंशा के साथ धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत बयानबाजी या तथ्यों को छिपाने के 'विशिष्ट साक्ष्य' के बिना केवल जीएसटी के भुगतान न करने के आधार पर सीजीएसटी (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 74(1) या धारा 74ए (5)(2) को लागू नहीं किया जा सकता है। इसमें कहा गया कि इन प्रावधानों को केवल इसलिए भी लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि जांच के दौरान कोई विसंगति पाई गई है, क्योंकि जांच कार्यवाही अभिलेखों की जांच करने और मामले की प्रकृति का पता लगाने के लिए की जाती है, न कि धोखाधड़ी का अनुमान लगाने के लिए।
सीबीआईसी ने कहा, ''ऐसे में इन प्रावधानों को केवल वहीं लागू किया जा सकता है जहां जांच से इस तरह के आचरण के ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, जिन्हें कारण बताओ नोटिस में भी स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया जाना चाहिए।'' यह परिपत्र आठ अक्टूबर को आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद आया है, जिसमें जीएसटी कानून और नियमों को अपराधमुक्त करने के कई बदलावों पर निर्णय लिया गया था।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के वित्त मंत्रियों वाली इस परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों को समाप्त करने का निर्णय लिया, जबकि अभियोजन सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दिया गया। जीएसटी कानून में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है और ये अगले साल एक अप्रैल से प्रभावी होंगे, जबकि प्रशासनिक कामकाज में बदलाव परिपत्र जारी करके किए जा रहे हैं।