सब्जियों और खाद्य पदार्थों की कीमतों ने जेब पर डाला बोझ, Veg-Non Veg थाली हुई महंगी

Edited By Updated: 06 Jan, 2025 05:39 PM

the prices of vegetables and food items have put a burden pocket

दिसंबर में सब्जियों और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर भारी असर डाला है। आलू, प्याज और टमाटर जैसे रोजमर्रा के सामान की कीमतों में तेज उछाल ने वेज और नॉन-वेज थाली की लागत को सालाना आधार पर क्रमशः 6% और 12% तक बढ़ा दिया है। वहीं,...

बिजनेस डेस्कः दिसंबर में सब्जियों और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर भारी असर डाला है। आलू, प्याज और टमाटर जैसे रोजमर्रा के सामान की कीमतों में तेज उछाल ने वेज और नॉन-वेज थाली की लागत को सालाना आधार पर क्रमशः 6% और 12% तक बढ़ा दिया है। वहीं, ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में भी 20% का इजाफा देखा गया है। हालांकि, महीने-दर-महीने आधार पर वेज थाली की कीमतों में कुछ राहत मिली है, जबकि नॉन-वेज थाली की कीमतें बढ़ी हैं। आइए क्रिसिल की रिपोर्ट के जरिए जानते हैं कि इस महंगाई ने थाली की कीमतों को कैसे प्रभावित किया।

वेज और नॉन वेज थाली हुई महंगी

क्रिसिल लिमिटेड की रिपोर्ट के अनुसार सब्जियों की कीमतों में तेजी के कारण घर में बनी शाकाहारी थाली की कीमत दिसंबर में सालाना आधार पर 6 फीसदी बढ़कर 31.60 रुपए हो गई, जो एक साल पहले 29.70 रुपए थी। आलू और टमाटर जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमत में तेज वृद्धि- जो शाकाहारी थाली की लागत का 24 फीसदी है- ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया। इस बीच मांसाहारी थाली की कीमत साल-दर-साल 12 फीसदी का इजाफा देखने को मिला और ये बढ़कर 63.30 रुपए हो गई, जो एक साल पहले 56.40 रुपए थी।

दिसंबर में टमाटर की कीमतें साल-दर-साल 24 फीसदी बढ़कर 38 रुपए से 47 रुपए प्रति किलोग्राम हो गईं, जबकि आलू की कीमतें 50 फीसदी बढ़कर 36 रुपए प्रति किलोग्राम हो गईं, जबकि एक साल पहले यह 24 रुपए थी। आलू की कीमतों में भारी वृद्धि का कारण पंजाब, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों में लेट ब्लाइट वायरस के कारण खराब पैदावार के कारण उत्पादन में अनुमानित 6 फीसदी की गिरावट है।

वहीं हाई इंपोर्ट ड्यूटी और त्योहारी और शादी के मौसम के दौरान बढ़ी मौसमी मांग के कारण वनस्पति तेल की कीमतें भी साल-दर-साल 16 फीसदी बढ़ीं। मांसाहारी थाली की लागत में वृद्धि ब्रॉयलर चिकन की कीमत में साल-दर-साल अनुमानित 20 फीसदी की वृद्धि के कारण हुई, जो कुल लागत का 50 फीसदी है। क्रिसिल ने कहा कि ब्रॉयलर की कीमतों में तेज उछाल पिछले साल के लोअर बेस के कारण है, जब उत्पादन अधिक था।

नवंबर के मुकाबले में कम हुए दाम

हालांकि, शाकाहारी भोजन के लिए मासिक आधार पर कुछ राहत देखने को मिली। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से ताजा सप्लाई आने के कारण टमाटर की कीमतों में 12 फीसदी की गिरावट के कारण शाकाहारी थाली की कीमत दिसंबर में 3 फीसदी गिरकर 31.60 रुपए देखनेको मिली, जो नवंबर में 32.70 रुपए थी। आलू की कीमतों में 2 फीसदी और प्याज की कीमतों में 12 फीसदी की गिरावट ने भी महीने-दर-महीने कमी में योगदान दिया।

मांसाहारी थाली की कीमतें महीने दर महीने 3 फीसदी बढ़ीं, नवंबर में 61.50 रुपए से बढ़कर दिसंबर में 63.30 रुपए हो गईं। क्रिसिल ने कहा कि यह ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 11 फीसदी की वृद्धि के कारण हुआ, जो उत्तरी भारत में शीत लहर के बीच उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग और बढ़ी हुई फ़ीड कॉस्ट के कारण और बढ़ गई।

फ्यूल की कीमतों में अच्छी गिरावट

फ्यूल की कीमतों में जबरदस्त राहत देखने को मिली है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत साल-दर-साल 11 फीसदी गिरकर दिसंबर में 803 रुपए हो गई, जो एक साल पहले 903 रुपए थी। सीपीआई पर आधारित खुदरा महंगाई अक्टूबर में 14 महीने के उच्चतम 6.21 फीसदी से घटकर नवंबर में तीन महीने के निचले स्तर 5.48 फीसदी पर आ गई। थाली की बढ़ती कीमतें घरेलू खर्च पर खाद्य महंगाई के प्रत्यक्ष प्रभाव को दर्शाती हैं, भोजन तैयार करने की औसत लागत उपभोक्ता संकट के एक महत्वपूर्ण बैरोमीटर के रूप में काम करती है।
 

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