भारतीय सोलर कंपनियों को झटका, अमेरिका ने लगाया भारी आयात शुल्क

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 12:29 PM

united states announced a 126 preliminary countervailing duty on imports

अमेरिका ने भारत पर अनुचित सब्सिडी दिए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ भारतीय सौर उत्पादों के आयात पर 125.87 प्रतिशत का प्रारंभिक प्रतिकारी शुल्क (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) लगाने की घोषणा की है। अमेरिका ने इंडोनेशिया और लाओस से आयातित 'क्रिस्टलाइन सिलिकॉन...

बिजनेस डेस्कः भारतीय सोलर उद्योग को अमेरिकी बाजार में बड़ा झटका लगा है। United States Department of Commerce ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और सोलर पैनल पर भारी काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाने की घोषणा की है। यह कदम भारत के अलावा Indonesia और Laos से आने वाले सोलर उत्पादों पर भी लागू होगा।

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन देशों की कंपनियों को सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलता है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ता है।

कितनी ड्यूटी तय

जारी फैक्ट शीट के अनुसार भारत पर 125.87% काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई गई है। इंडोनेशिया पर 104.38% और लाओस पर 80.67% ड्यूटी निर्धारित की गई है। यह फैसला अमेरिकी सोलर निर्माताओं के एक समूह द्वारा दायर याचिका के बाद लिया गया है।

आयात में बड़ी हिस्सेदारी

व्यापार आंकड़ों के मुताबिक 2025 में इन तीन देशों से अमेरिका ने करीब 4.5 अरब डॉलर के सोलर उत्पाद आयात किए, जो उसके कुल सोलर आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।

डंपिंग पर अगला फैसला बाकी

यह जांच का पहला चरण है। अगले महीने यह तय किया जाएगा कि क्या इन कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में उत्पादन लागत से कम कीमत पर उत्पाद बेचे। यदि डंपिंग के आरोप सही पाए गए तो अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।

कंपनियों पर अलग-अलग असर

देशवार दरों के अलावा कुछ कंपनियों पर विशेष ड्यूटी तय की गई है। भारत की Mundra Solar पर 125.87% ड्यूटी लागू होगी। इंडोनेशिया की PT ब्लू स्काई सोलर पर 143.3% और PT REC सोलर एनर्जी पर 85.99% ड्यूटी लगाई गई है। वहीं लाओस की सोलरस्पेस टेक्नोलॉजी सोल कंपनी और वियतनाम सनर्जी जॉइंट स्टॉक कंपनी पर 80.67% ड्यूटी तय की गई है।

अमेरिकी उद्योग की दलील

यह शिकायत Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने दर्ज कराई थी। इस गठबंधन में Hanwha Qcells, First Solar और Mission Solar जैसी कंपनियां शामिल हैं। समूह का कहना है कि सब्सिडी वाले आयात से घरेलू निवेश और रोजगार पर असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक सोलर सप्लाई चेन में फिर बदलाव आ सकता है। भारतीय निर्यातकों के लिए यह निर्णय एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आगे आने वाले एंटी-डंपिंग फैसले से स्थिति और स्पष्ट होगी।
 

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