Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Feb, 2026 05:58 PM

भारत में परिवारों के पास जमा सोने की कुल कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। तेजी से बढ़ती गोल्ड प्राइस के चलते घरेलू सोने का अनुमानित मूल्य करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो देश की नॉमिनल जीडीपी से भी ज्यादा माना जा रहा है। अनुमान है कि...
बिजनेस डेस्कः भारत में परिवारों के पास जमा सोने की कुल कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। तेजी से बढ़ती गोल्ड प्राइस के चलते घरेलू सोने का अनुमानित मूल्य करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो देश की नॉमिनल जीडीपी से भी ज्यादा माना जा रहा है। अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास करीब 30,000 टन सोना है। हालांकि विशेषज्ञ साफ करते हैं कि जीडीपी और सोने के मूल्य की तुलना सीधे तौर पर सही नहीं है, क्योंकि जीडीपी सालभर की आर्थिक गतिविधियों को दर्शाती है, जबकि सोना संचित संपत्ति है और इसकी कीमत बाजार के उतार-चढ़ाव से बदलती रहती है।
कीमतों में उछाल बना सबसे बड़ा कारण
सोने की कीमतों में आई तेज और लगातार बढ़ोतरी ने घरेलू सोने के मूल्य को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। साल 2025 में ही सोने की कीमतों में करीब 65% का उछाल दर्ज किया गया, जिसने पारंपरिक अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।
तेजी के पीछे कौन से फैक्टर?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई से बचाव की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद और डॉलर पर घटता भरोसा सोने की तेजी के बड़े कारण हैं। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव और कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय दबाव ने भी निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की ओर मोड़ा है।
बदलती वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था का संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया धीरे-धीरे नई मौद्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां सोना फिर से एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में अहम भूमिका निभा रहा है। निवेशक और केंद्रीय बैंक दोनों अनिश्चित माहौल में सोने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
भारत में सोने की भूमिका पर बहस
भारत में सोना पारंपरिक बचत का बड़ा साधन माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे कम उत्पादक संपत्ति भी बताते हैं। उनका कहना है कि सोना आपातकालीन सुरक्षा देता है, जबकि लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि में हिस्सेदारी के लिए इक्विटी जैसे विकल्प ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं।
अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर घरेलू सोने का कुछ हिस्सा औपचारिक वित्तीय सिस्टम में आए तो इसका व्यापक आर्थिक असर हो सकता है। साथ ही, केंद्रीय बैंकों द्वारा बढ़ती खरीदारी और विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ने से इसकी वैश्विक मांग भी मजबूत बनी हुई है।