Vegetable Prices Crash: सब्जियों के दाम धड़ाम, किसानों की बढ़ी मुश्किलें, उपभोक्ताओं को राहत

Edited By Updated: 01 Apr, 2026 11:32 AM

vegetable prices crash up to 80 since january deepening farm distress

सब्जियों की कीमतों में आई तेज गिरावट ने जहां उपभोक्ताओं को राहत दी है, वहीं किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जनवरी से अब तक आलू, प्याज और टमाटर के दाम में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खेती की लागत निकालना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है।

बिजनेस डेस्कः सब्जियों की कीमतों में आई तेज गिरावट ने जहां उपभोक्ताओं को राहत दी है, वहीं किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जनवरी से अब तक आलू, प्याज और टमाटर के दाम में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खेती की लागत निकालना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है।

आलू-प्याज-टमाटर के दाम गिरे

थोक बाजारों में आलू की कीमत करीब 40% तक गिरकर दिल्ली के आज़ादपुर मंडी में लगभग ₹4 प्रति किलो रह गई है। वहीं प्याज के दाम करीब 50% टूटकर महाराष्ट्र के लासलगांव मंडी में ₹10-11 प्रति किलो पर आ गए हैं। टमाटर की कीमतों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है, जो 80% तक टूटकर पिंपलगांव मंडी में करीब ₹7 प्रति किलो पर पहुंच गई है।

अनाज भी सस्ता

सब्जियों के साथ-साथ गेहूं और चावल की कीमतों में भी नरमी आई है। गेहूं करीब 10% और चावल 5-6% तक सस्ता हुआ है, जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिली है।

क्यों गिरे दाम?

कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं—बंपर उत्पादन, कमजोर निर्यात मांग, एलपीजी संकट और फसल के मौसम में भारी आवक। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण प्याज के निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति हो गई है।

LPG संकट का असर

एलपीजी की कमी का असर टमाटर की मांग पर भी पड़ा है। होटल और रेस्टोरेंट्स में गैस की कमी के चलते टमाटर की खपत कम हो गई है। अशोक कौशिक के मुताबिक, फरवरी के अंत से मांग लगातार गिर रही थी और अब लगभग खत्म हो चुकी है, जिससे पिछले एक महीने में कीमतों में करीब 40% की गिरावट आई है।

किसानों पर बढ़ा दबाव

अलग-अलग राज्यों में देसी टमाटर की ज्यादा उपलब्धता के कारण महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से आने वाली सप्लाई की मांग भी कम हो गई है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज लागत से भी कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर सस्ती सब्जियां महंगाई को कम करने में मदद कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है।
 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!