Kashmiri Handicrafts Industry: कश्मीरी कालीन उद्योग पर युद्ध की मार, लाखों की आजीविका दांव पर

Edited By Updated: 03 Apr, 2026 05:06 PM

war deals a blow to kashmir s carpet industry livelihoods of millions stake

पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण कश्मीर का हस्तशिल्प क्षेत्र गहरे संकट में है, जिसमें विशेष रूप से कालीन उद्योग प्रभावित हुआ है। निर्यातकों के अनुसार पुराने ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और नए ऑर्डर लगभग ठप हैं। सरकार की...

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण कश्मीर का हस्तशिल्प क्षेत्र गहरे संकट में है, जिसमें विशेष रूप से कालीन उद्योग प्रभावित हुआ है। निर्यातकों के अनुसार पुराने ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और नए ऑर्डर लगभग ठप हैं। सरकार की तरफ़ से दुबई, चीन और डेनमार्क में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी रद्द होने से नए ऑर्डरों की उम्मीद भी खत्म हो गई है। इसका असर लाखों कारीगरों, बुनकरों और व्यापारियों की आजीविका पर पड़ा है। कश्मीर के हस्तशिल्प में कालीन, पैपियर-मैशे, पश्मीना शॉल, कानी बुनाई, सोज़नी कढ़ाई और लकड़ी पर नक्काशी शामिल हैं, जिनका निर्यात लगभग 25 देशों में होता है। इनमें खाड़ी देशों का हिस्सा लगभग 60% है।

नए ऑर्डरों में आई अचानक गिरावट 

कश्मीर चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तारिक गाणी के अनुसार, नए ऑर्डरों में अचानक गिरावट आई है। खरीदार अनिश्चितता और व्यापार में बाधा के चलते खरीदारी रोक रहे हैं। वहीं कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष जावेद अहमद टेंगा ने बताया कि रमज़ान का महीना पारंपरिक रूप से निर्यातकों के लिए सबसे अहम होता है लेकिन मौजूदा स्थिति में भुगतान और नए ऑर्डर दोनों बाधित हैं।

कारीगरों के पास काम कम 

हवाई मार्गों में रुकावट, बढ़ते इंश्योरेंस प्रीमियम और शिपमेंट लागत में वृद्धि ने संकट को और गंभीर बना दिया है। दुबई में ‘ग्लोबल विलेज’ के 15 दिन बंद रहने से बिक्री का प्रमुख प्लेटफॉर्म भी अनुपलब्ध हो गया। इससे व्यापारियों की आमदनी में गिरावट आई है और कारीगरों के पास काम कम हो गया है।

हस्तशिल्प निर्यात में 57% की गिरावट

वर्ष 2013 में जम्मू-कश्मीर का हस्तशिल्प निर्यात 1,700 करोड़ रुपए था, जो 2024-25 में घटकर 733 करोड़ रुपए रह गया यानी लगभग 57% की गिरावट दर्ज हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो कश्मीर के हस्तशिल्प उद्योग के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थायी रूप से खोने का खतरा है।

इस समय कारीगर, निर्यातक और व्यापारी भुगतान में देरी और नए ऑर्डरों के अभाव से प्रभावित हैं। उनकी चिंता है कि यदि वैश्विक संकट जारी रहा, तो यह क्षेत्र आर्थिक रूप से और गहरे संकट में चला जाएगा।
 

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