Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 May, 2026 04:43 PM

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इन दिनों भारी कैपिटल आउटफ्लो की चुनौती से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में चीन से करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी विदेश भेजी गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। 2021 के बाद से देश...
बिजनेस डेस्कः दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इन दिनों भारी कैपिटल आउटफ्लो की चुनौती से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में चीन से करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी विदेश भेजी गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। 2021 के बाद से देश से बाहर जाने वाले निवेश में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी निवेशक विदेशी ब्रोकर्स के जरिए पैसा बाहर भेजकर खासतौर पर Hong Kong और अमेरिकी बाजारों में निवेश कर रहे हैं। लगातार बढ़ते आउटफ्लो को देखते हुए चीनी सरकार ने अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
क्रॉस-बॉर्डर ट्रेडिंग पर सख्ती
22 मई को चीन ने सीमा पार स्टॉक ट्रेडिंग पर कई नई पाबंदियां लागू कर दीं। सरकार ने अवैध विदेशी ट्रेडिंग अकाउंट्स को अगले दो वर्षों में बंद करने का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य देश से तेजी से बाहर जा रही पूंजी पर रोक लगाना है।
तीन विदेशी ब्रोकर्स पर कार्रवाई
चीन ने तीन ऑफशोर ऑनलाइन ब्रोकरेज कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया है। इनमें Futu Holdings, टाइगर ब्रोकर्स और Longbridge Securities शामिल हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने बिना सरकारी अनुमति के चीनी निवेशकों को करीब 330 मिलियन डॉलर के विदेशी शेयर बेचे।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन अब पूंजी पलायन रोकने और घरेलू बाजार में निवेश बनाए रखने के लिए निगरानी और नियमों को और कड़ा कर सकता है।