Adhik Maas Purnima 2026 : कब मनाई जाएगी अधिक मास की पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Edited By Updated: 25 May, 2026 02:49 PM

adhik maas purnima 2026

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। यह दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है। वहीं, अगर  ये तिथि अधिकमास में आए तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है। अधिकमास पूर्णिमा ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी।

Adhik Maas Purnima 2026 : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। यह दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है। वहीं, अगर  ये तिथि अधिकमास में आए तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है। अधिकमास पूर्णिमा ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से  श्री हरि और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में आ रही सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और सभी पापों का नाश  होती है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ जप,तप और दान करने का भी खास महत्व है। साथ ही इस दिन गंगा नदी या किसी पवित्र स्नना-दान और पूजा पाठ किया जाता है। तो आइए जानते हैं अधिकास की पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

अधिकमास पूर्णिमा 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 मई शनिवार को दिन में 11 बजकर 57 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 31 मई रविवार को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा।

अधिकमास की पूर्णिमा पर स्नान-दान का मुहूर्त 

अधिकमास की पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 34 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 01 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। फिर विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। 

अधिकमास की पूर्णिमा पूजा विधि

अधिकमास की पूर्णिमा तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। 

फिर घर के मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें। 

इसके बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

उसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ विष्णु जी की पूजा करें और सत्यानारयण की कथा सुनें।

विष्णु जी को पीले फूल,फल, मिठाई, धूप और पंचामृत अर्पित करें और क्षमतानुसार, गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अन्य जरूरत की चीजों का दान करें।

अंत में माता लक्ष्मी और श्री हरि के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें। 

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