Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Jul, 2026 12:03 PM

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये दिन देवों के देव महादेव की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत खास होता है। हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।
Ravi Pradosh Vrat 2026 : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये दिन देवों के देव महादेव की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत खास होता है। हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव और पार्वती की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में मधुरता और खुशहाली बनी रहती है। साथ ही जो कन्या इस दिन पूरे विधि-विधान से शिव-पार्वती की आराधना करने के साथ उपवास रखती है उसे मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं आषाढ़ के प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में-
आषाढ़ रवि प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 2 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 12 जुलाई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष व्रत में शिव पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई को रखा जाएगा।
पूजा मुहूर्त - रात 7 बजकर 22 मिनट से रात 9 बजकर 24 मिनट तक

रवि प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में शिव जी अपने गण नंदी पर विराजमान होकर कई देवगणों से घिरे रहते हैं। जो भी इस दौरान सच्चे मन से और विधि-विधान से शिव जी की पूजा करता उसके जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी पापों का नाश होता है। साथ ही जीवन के हर क्षेत्र में मनचाही सफलता प्राप्त होती है।

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