Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Oct, 2026 01:22 PM

Navratri 2026 Kanya Pujan: नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का सही समय, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और नियम जानें। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं के पूजन और भोग की पूरी जानकारी।
Navratri Kanya Pujan Vidhi 2026: नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। यूं तो नवरात्रि के किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है परन्तु कन्या पूजन के लिए अष्टमी और नवमी तिथि को श्रेष्ठ माना गया है। नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजन करने के बाद ही भक्त अपना व्रत पूरा करते हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार देवराज इंद्र ने जब भगवान ब्रह्माजी से भगवती को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो उन्होंने सर्वोत्तम विधि के रूप में कुमारी पूजन ही बताया। यही कारण है कि तब से आज तक नवरात्रि में कन्या पूजन किया जाता है।
अष्टमी पर कन्या पूजन कब करें
जो लोग अष्टमी पर कंजक पूजन करते हैं, वे लोग 18 अक्टूबर को कन्या पूजन करें। नवरात्रि की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। इस पंचांग में अष्टमी की डेट उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर 2026 बताई गई है, लेकिन महाअष्टमी 18 अक्टूबर को मनाना ज्यादा उचित रहेगा क्योंकि कालरात्रि महारात्रि मोहरात्रिस्थ दारूणा यानी आश्विन शुक्ल पक्ष अष्टमी को मोहरात्रि कहते हैं।
नवमी पर कंजक पूजा का सही समय
जो लोग नवरात्रि की नवमी पर कन्या पूजन करके अपना व्रत खोलते हैं। वे 19 तारीख को कन्या पूजन यानी नवमी पूजा करें। 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद और कुछ परंपराओं के अनुसार 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे तक कन्या पूजना किया जा सकता है।

कब है नवमी कन्या पूजन
पंचांग के अनुसार, 19 तारीख को नवमी तिथि 10 बजकर 52 मिनट के बाद आरंभ हो रही है। ऐसे में जो लोग नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करते हैं। वह 10 बजकर 52 मिनट के बाद कर सकते हैं लेकिन व्रत का पारण आप 20 तारीख को सुबह में 12 बजकर 50 मिनट से पहले करें। नवमी तिथि का कन्या पूजन आप 19 तारीख में सुबह में 10 बजकर 52 मिनट के बाद करें। आप चाहें तो नवमी तिथि का कन्या पूजन 20 तारीख को भी कर सकते हैं लेकिन सुबह में 12 बजकर 50 मिनट से पहले-पहले क्योंकि इसके बाद दशमी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
नवमी तिथि का आरंभ 19 अक्टूबर 2026 सुबह में 10 बजकर 52 मिनट के बाद।
नवमी तिथि का समापन 20 अक्टूबर 2026 दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट पर।
नवमी तिथि का कन्या पूजन 19 तारीख में सुबह में 10 बजकर 52 मिनट से पहले। हालांकि, 18 तारीख में भी नवमी तिथि का कन्या पूजन किया जा सकता है।
कन्या पूजन में कितने वर्ष की कन्याओं को बुलाएं
शास्त्रों के अनुसार, कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की आयु की कन्याओं को बुलाना चाहिए। इस वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना जाता है। कन्याओं के साथ साथ एक छोटा बालक जिसे भैरव बाबा या लांगुर भी कहा जाता है। उसका भी पूजन करने का विधान है। कन्या पूजन के लिए सबसे पहले कन्याओं को आदरपूर्वक अपने घर पर आमंत्रित करें। इसके बाद उनके पैर अच्छे से साफ करें। माथे पर रोली का तिलक और हाथ में कलावा बांधे। अब उन्हें लाल रंग की चुनरी भेंट करें। इसके बाद हलवा, पूरी और चने का भोग लगाएं। भोजन के बाद अपने सामर्थ्य अनुसार, दक्षिण देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और फिर विदा करें।

कन्या पूजन की विधि और नियम
कन्याओं की उम्र 3 से 10 साल तक होनी चाहिए। कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए और इनके साथ एक बालक को भी जरूर बिठाएं।
कन्याओं के घर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले उनके पैर धोने चाहिए।
कन्याओं को साफ प्रवेश में ही बुलाना चाहिए क्योंकि उन्हें नौ देवियां मानकर पूजा जा रहा है। इसलिए घर की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
कन्याओं को रोली लगाकर उनके हाथ पर कलावा जरूर बांधना चाहिए।
कन्याओं को घी का दीपक दिखाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए।
इसके बाद कन्याओं को भोग लगाएं। भोग में हलवा, पूरी और चना होना उत्तम माना गया है।
अंत में कन्याओं को भेंट देकर और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।
यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
संपर्क सूत्र - 9005804317, 7054594317
