Edited By Niyati Bhandari,Updated: 02 Jul, 2026 02:40 PM

Ashadha Gupt Navratri 2026: जानें साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की सही तारीख, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और मां दुर्गा की गुप्त साधना का धार्मिक महत्व। 15 जुलाई से शुरू होंगे नौ दिन के विशेष अनुष्ठान।
Ashadha Gupt Navratri 2026 Date: सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना गया है। आमतौर पर लोग वर्ष में दो बार आने वाली चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में जानते हैं, लेकिन इनके अलावा दो 'गुप्त नवरात्रियां' भी आती हैं। इसमें आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टि से विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भक्ति और साधना के अद्भुत संयोग के साथ आ रही है।
कब से शुरू हो रही है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि?
साल 2026 में आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई, बुधवार से प्रारंभ होगी और इसका समापन 23 जुलाई, गुरुवार को होगा। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ 'दस महाविद्याओं' की गुप्त रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।

Ashadha Gupt Navratri Ghatasthapana Muhurat आषाढ़ गुप्त नवरात्रि घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। उदयातिथि के अनुसार 15 जुलाई 2026 को ही कलश स्थापित किया जाएगा।
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक।
वैकल्पिक मुहूर्त (कुछ पंचांगों के अनुसार): सुबह 05:33 बजे से 10:09 बजे तक।
तिथि विवरण: प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 03:12 बजे शुरू होगी और 15 जुलाई को सुबह 11:50 बजे समाप्त होगी।
क्यों खास है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि?
हिंदू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन आमजन केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है। इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्रि होती है। इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवें महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्रि मनाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। आषाढ़ व माघ मास की नवरात्रियों में काफी भिन्नताएं हैं। आषाढ़ मास की नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है, वहीं माघ मास की नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है।
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का समय शाक्य एवं शैव धर्मावलंबियों के लिए पैशाचिक, वामाचारी क्रियाओं के लिए अधिक शुभ एवं उपयुक्त होता है। इसमें प्रलय एवं संहार के देवता महाकाल एवं महाकाली की पूजा की जाती है। इन्हीं संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी आदि की साधना की जाती है।
ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं। दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंचमकार की साधना इसी नवरात्रि में की जाती है।
गुप्त नवरात्रि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तक मनाई जाती है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना करने का विधान है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। साथ ही विशेष कार्यों में सिद्धि पाने के लिए व्रत- उपवास भी रखा जाता है। तंत्र-मंत्र की साधना के लिए ये गुप्त नवरात्रि बेहद खास मानी गई है। गुप्त नवरात्रि में किया गया पूजा-पाठ जल्दी फलीभूत होता है।
