आषाढ़ मास 2026: कंगाली मिटाने और अक्षय पुण्य के लिए करें ये महादान, ऋतु परिवर्तन के दोषों से मुक्ति दिलाएंगे शास्त्रों के ये अचूक उपाय

Edited By Updated: 30 Jun, 2026 03:57 PM

ashadha month 2026

Ashadha Month 2026: साल 2026 में आषाढ़ का महीना 30 जून से शुरू हो रहा है। जानें भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किन चीजों का दान करें और कंगाली दूर करने के शास्त्रों में बताए गए गुप्त उपाय।

Ashadha 2026 Rituals & Charity: हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ का महीना आध्यात्मिक साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। साल 2026 में आषाढ़ मास की शुरुआत 30 जून से हो रही है, जिसका समापन 29 जुलाई को होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे महीने में किए गए शुभ कार्य और दान न केवल जीवन में सकारात्मकता लाते हैं, बल्कि व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति भी कराते हैं। यदि आप भी अपने जीवन से आर्थिक तंगी दूर करना चाहते हैं और भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताए गए इन विशेष दानों को आषाढ़ मास में जरूर करें:

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Donations to be made in the month of Ashadha आषाढ़ मास में  किए जाने वाले दान- हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास को वर्ष का चौथा मास कहा जाता है और ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली भयंकर गर्मी से राहत मिलने के आसार आषाढ़ माह में ही नज़र आने शुरु हो जाते हैं। ये ऋतु परिवर्तन का समय है। इस दौरान बहुत तरह के रोग पनपते हैं। मानव, पशु-पक्षी और वनस्पति इसकी लपेट में आ जाते हैं। रोगों से निजात प्राप्त करने के लिए हमे नवदुर्गा की उपासना करनी चाहिए। इस महीने में खड़ाऊं, छाता, नमक और आंवले के दान का बहुत महत्व है। इसके अतिरिक्त गुड़, तिल, वस्त्र, छाता, चप्पल, अन्नदान, जल और घड़े का दान कर सकते हैं। संभव न हो तो आषाढ़ी पूर्णिमा को दान पुण्य जरुर करने चाहिए।

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If you do not have the means to donate, do this instead दान करने की शक्ति न हो तो करें ये काम- वर्षा ऋतु के माह को आषाढ़ माह इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मास ज्येष्ठ व सावन मास के बीच आता है। हिंदू पंचांग में सभी महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। मास की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के नाम पर रखा गया है। आषाढ़ महीने का नाम भी पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों पर आधारित है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा को चंद्रमा इन्हीं नक्षत्रों में रहता है, जिस कारण इस महीने का नाम आषाढ़ पड़ा है। संयोगवश अगर पूर्णिमा के दिन उत्ताराषाढ़ा नक्षत्र हो तो ये बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। इस संयोग में दस विश्वदेवों की पूजा की जाती है।

गौ सेवा करें। गाय को जल पिलाएं। उनके आसपास के स्थान को साफ-स्वच्छ करें। परिक्राम करने के बाद प्रणाम करें। पशु-पक्षियों का ध्यान रखें। उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें।

भगवान विष्णु की पूजा करें। आषाढ़ का महीना श्री हरि विष्णु की आराधना को समर्पित है। इस दौरान जप, तप और पूजा-पाठ करने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करने से व्यक्ति के जीवन में कभी धन-दौलत की कमी नहीं रहती।

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