Edited By Niyati Bhandari,Updated: 30 Jun, 2026 04:16 PM

Ashadha Month 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की विदाई के साथ ही आषाढ़ महीने की शुरुआत हो गई है। सनातन धर्म में इस महीने को वर्षा ऋतु के आगमन और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का काल माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह साल का चौथा...
Ashadha Rituals 2026: हिंदू पंचांग का चौथा महीना 'आषाढ़' अपनी झोली में वर्षा की फुहारों के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना का महाकुंभ लेकर आता है। ज्येष्ठ की तपन की विदाई के बाद आषाढ़ का आगमन न केवल प्रकृति को शीतलता प्रदान करता है, बल्कि यह मनुष्य के अंतर्मन को शुद्ध करने और नई ऊर्जा के संचार का भी काल है। इसी पावन महीने में देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु योग निद्रा में लीन हो जाते हैं, जो 'चातुर्मास' के कड़े अनुशासन और साधना के दौर की शुरुआत का संकेत है। शास्त्रों में इस मास के दौरान जीवनशैली और खान-पान को लेकर जो कड़े नियम बताए गए हैं, वे न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे पूर्णतः वैज्ञानिक और हमारे स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी अनिवार्य माने गए हैं।

Ashadha Month 2026 Rules: आषाढ़ माह में इन नियमों का करें पालन
आषाढ़ माह के देवता सूर्य और मंगल हैं। सुबह जल्दी उठने का नियम बनाएं। सूर्योदय के बाद तक सोते रहने से कुंडली में सूर्य दोष लगता है और स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
इस महीने हरी पत्तेदार सब्जियां खाना वर्जित है। आयुर्वेद के अनुसार भी इस समय साग खाने से पेट की बीमारियां हो सकती हैं।
एकान्त साधना करें। दिन में एक बार मौन धारण करें और केवल आत्म-स्वरूप पर ध्यान करें।

शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ में ज्ञान की अग्नि का बीज बोया जाता है। इस मास में गुरु से दीक्षा लेना या पुरानी दीक्षा पर साधना गहराना सर्वोत्तम फलदायक होता है।
आषाढ़ जल प्रधान मास है, जल तत्त्व का संयम और साधना विशेष मानी गई है।

स्नान के बाद गंगायै नमः, वरुणाय नमः कहकर जल अर्पण करें।
इस मास में मांस, मद्य, अधिक नमक, अधिक तेल का त्याग करें, यह मन को स्थिर करता है।
आषाढ़ में वर्षा से जठराग्नि मंद होती है इसलिए शास्त्रों में उपवास, त्रिफला सेवन और कफ-शोधक काढ़ों का प्रयोग बताया गया है।

आषाढ़ के महीने में यज्ञ और हवन करना बहुत ही शुभ होता है। जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से अपने घर अथवा मंदिर में हवन करता है, उससे जीवन में आने वाली हर परेशानी से छुटकारा मिलता है।
आषाढ़ माह में स्नान के साथ दान करने का भी बहुत महत्व है। इस माह में अपनी क्षमता अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की खास कृपा बनी रहती है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है।
शास्त्रों के अनुसार, इस माह में बड़ा कर्ज लेने या देने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय शुरू हुआ तनाव लंबे समय तक रह सकता है।
