Edited By Prachi Sharma,Updated: 06 Mar, 2026 08:21 AM

Banke Bihari Mandir : वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में व्यवस्थाओं को लेकर सेवायतों और उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। गुरुवार सुबह एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बन गई, जब सेवायत के...
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Banke Bihari Mandir : वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में व्यवस्थाओं को लेकर सेवायतों और उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। गुरुवार सुबह एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बन गई, जब सेवायत के यजमानों के मंदिर में प्रवेश को अचानक रोक दिया गया।
बताया जा रहा है कि सुबह करीब आठ बजे तक सेवाधिकारी के यजमान वीआईपी गेट के माध्यम से मंदिर में आकर दर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने आकर सूचित किया कि अब किसी भी यजमान को अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जब सेवायत की ओर से इस आदेश के बारे में पूछा गया तो पुलिसकर्मी ने बताया कि यह निर्देश ऊपर से दिए गए हैं।
उस समय सेवायत ब्रजेश गोस्वामी उर्फ मोंटू गोस्वामी की सेवा चल रही थी। गोस्वामी समाज का आरोप है कि उनकी सेवा के दौरान जानबूझकर यजमानों के प्रवेश पर रोक लगाई गई। उनका कहना है कि उन्होंने ठाकुरजी को जगमोहन में विराजित कराने के बजाय परंपरा के अनुसार गर्भगृह से ही दर्शन कराए, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई।
गोस्वामी पक्ष का यह भी कहना है कि पहले जिन सेवायतों की सेवा थी, उस समय यजमानों के प्रवेश पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी। उनका आरोप है कि उस समय प्रवेश की अनुमति इसलिए दी गई क्योंकि वे प्रबंधन समिति से जुड़े हुए थे। अब अचानक मौखिक आदेश के जरिए नियम बदल दिए गए हैं।
गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का उद्देश्य केवल भीड़ प्रबंधन है, लेकिन समिति मंदिर की प्राचीन परंपराओं में हस्तक्षेप कर रही है। उनका तर्क है कि मंदिर की परंपरा के अनुसार शयन, शृंगार और भोग जैसी प्रमुख सेवाएं गर्भगृह में ही संपन्न होती हैं और विशेष अवसरों पर ही ठाकुरजी को जगमोहन में विराजमान किया जाता है।
वहीं प्रबंधन समिति के सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी का कहना है कि वी.आई.पी व्यवस्था पहले से ही प्रतिबंधित थी और उसी आदेश का पालन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वीआईपी प्रवेश की व्यवस्था कब और किसके निर्देश पर शुरू हुई, यह जांच का विषय है।