Edited By Niyati Bhandari,Updated: 22 Jan, 2026 10:05 AM

Basant Panchami 2026: हिंदू धर्म में बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सृष्टि के नवसृजन, उल्लास और चेतना के जागरण का प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा का विशेष विधान है।...
Basant Panchami 2026: हिंदू धर्म में बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सृष्टि के नवसृजन, उल्लास और चेतना के जागरण का प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा का विशेष विधान है। धार्मिक ग्रंथों, साहित्य और भारतीय संस्कृति में बसंत ऋतु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यही कारण है कि भगवद्गीता में स्वयं श्रीकृष्ण ने कहा, “ऋतूनां कुसुमाकर:” यानी ऋतुओं में मैं बसंत हूं।

ज्योतिष और दर्शन में बसंत को कारक भी और मारक भी कहा गया है। यह सृजन, प्रेम और उल्लास का कारक है, वहीं दूसरी ओर यह स्थैर्य और जड़ता को तोड़ देता है। शीत ऋतु की निष्क्रियता के बाद बसंत जीवन में नई ऊर्जा भर देता है। पेड़ों पर नए पत्ते, सरसों के पीले फूल, कोयल की कूक और आम्र-मंजरी की सुगंध सब मिलकर बसंत को ऋतुओं का राजा बनाते हैं।

क्यों कहा जाता है बसंत को मधुमास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत को मधुमास कहा जाता है। महुआ का फूल, मधुमक्खियों का शहद और प्रकृति की मादक सुगंध इस ऋतु को विशिष्ट बनाती है। पुराणों में उल्लेख है कि सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही रतिकाम उत्सव प्रारंभ होता था। इसी कारण बसंत को कामदेव का मित्र और पुत्र माना गया है।

रामायण और त्रेता युग से जुड़ा है बसंत पंचमी
मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ही भगवान श्रीराम शबरी से मिले थे। गुजरात और मध्य प्रदेश के दंडकारण्य क्षेत्र में आज भी इस घटना से जुड़ी आस्थाएं जीवित हैं। इसके अलावा इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य माना जाता है, इसलिए यह दिन विद्यार्थियों, लेखकों और कलाकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
साहित्य और संगीत में बसंत की छाप
कालिदास, बाणभट्ट, बिहारी, निराला से लेकर आधुनिक कवियों तक सभी ने बसंत को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। शास्त्रीय संगीत में राग बसंत, बहार, धमार और होरी इसी ऋतु की देन हैं। बैजू बावरा से लेकर भीमसेन जोशी तक, बसंत संगीत की आत्मा रहा है।
देशभर में ऐसे मनाई जाती है बसंत पंचमी
बंगाल में सरस्वती पूजा, पंजाब-हरियाणा में पतंगबाजी, बिहार-उड़ीसा में हल पूजा और उत्तर भारत में पीले वस्त्र व व्यंजन। बसंत पंचमी पूरे भारत में विविध रंगों में मनाई जाती है।