इस स्थान पर भरत लाए थे सभी तीर्थों का जल, जानें किस नाम से है प्रसिद्ध

Edited By Updated: 23 May, 2021 03:01 PM

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राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है

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राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है, जहां भरत जी श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए सभी तीर्थों का जल लाए थे। इसके अलावा स्फटिक से बनी एक अद्भुत शिला से लेकर देवांगना, मांडव्य आश्रम आदि शामिल हैं।

भरत कूप, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
भरत जी श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए सभी तीर्थों का जल लाए थे। वह पवित्र जल अत्रि मुनि के परामर्श से भरत  कूप में स्थापित किया था। भरतकूप कर्वी से 18 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।
(ग्रंथ उल्लेख : मानस 2/307/2, 4 2/309 दोहा से 2/310 दोहा तक, मानस 2/311/1, 2, 3,  2/312 दोहा)

देवांगना, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
यहां इन्द्रपुत्र जयंत की पत्नी ने तपस्या की थी। वनवास काल में श्रीराम के दर्शनार्थ देव कन्याएं यहां एकत्रित हुई थीं। आज भी यहां तपस्वी साधना करते हैं।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा, 2/307/2, 2/311/3, 2/312 दोहा)

मांडव्य आश्रम, मंडफा, उत्तर प्रदेश
इसका वर्तमान नाम मंडफा है जो मांडव्य का अपभ्रंश है। पहाड़ी का नाम भी मंडफा है। यहां भरत जी की बहुत मान्यता है।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा 2/307/2 2/311/3 2/312 दोहा)

रामघाट, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
यह चित्रकूट का बहुत ही प्रसिद्ध स्थल है। पास ही यज्ञवेदी मंदिर है। कुछ विद्वानों का मत है कि यही वह स्थान विशेष है जहां वनवास काल में श्री सीता-राम जी रहते थे। यह भी विश्वास किया जाता है कि हनुमान जी की कृपा से गोस्वामी तुलसीदास जी को यहां श्री राम-लक्ष्मण जी के दर्शन हुए थे।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा, 2/307/2, 2/311/3, 2/312 दोहा)

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