मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच बीजिंग में लावरोव का कड़ा बयानः US-NATO या UN नहीं रहे काम के, रूस और चीन दुनिया के नए "स्टेबलाइज़र"

Edited By Updated: 15 Apr, 2026 01:53 PM

china s president xi jinping met with russian foreign minister sergei lavrov

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति का केंद्र बने बीजिंग में Xi Jinping ने Sergey Lavrov से मुलाकात की। कई देशों के नेता भी चीन पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय संकट पर चीन की भूमिका और प्रभाव बढ़ता दिख रहा है।

Bejing: चीन की राजधानी Beijing एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने बुधवार को रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov से अहम मुलाकात की। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने राष्ट्रपति Xi Jinping से मुलाकात के दौरान कहा कि दुनिया “सैन्य मोड़” की ओर बढ़ रही है और इस स्थिति में  रूस और चीन दुनिया की ज़्यादातर आबादी के लिए "स्टेबलाइज़र" हैं।

 

🇷🇺🇨🇳 🚨 URGENT: Lavrov just told Xi to his face: the world is taking a "military turn" and Russia and China are the "stabilizers" for the global majority.

Not the US. Not NATO. Not the UN. Moscow and Beijing.

This isn't rhetoric. This is a direct declaration that the two… pic.twitter.com/s9R7wsEdOx

— New Direction AFRICA (@Its_ereko) April 15, 2026

उन्होंने स्पष्ट कहा- US, NATO या UN काम के नहीं रहे अब सिर्फ मॉस्को और बीजिंग वैश्विक स्थिरता के प्रमुख स्तंभ हैं। यह कोई बयानबाज़ी नहीं है। यह सीधे तौर पर यह ऐलान है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी न्यूक्लियर ताकतें खुद को पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले सिस्टम के विकल्प के तौर पर पेश कर रही हैं। और वे यह बात बीजिंग में कैमरे के सामने ज़ोर-शोर से कह रहे हैं ग्लोबल साउथ  अमेरिका में कोलेटरल डैमेज होने से थक चुका है।  लावरोव ने संकेत दिया कि रूस और चीन खुद को पश्चिमी नेतृत्व वाली व्यवस्था जैसे अमेरिका, NATO और संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में देख रहे हैं। रूस-चीन का यह संदेश खासतौर पर “ग्लोबल साउथ” यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को ध्यान में रखकर दिया गया है। इन देशों को पश्चिमी नीतियों से प्रभावित या उपेक्षित माना जाता रहा है, और अब रूस-चीन उन्हें अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

 

इस बैठक का एक बड़ा मुद्दा ईरान से जुड़े युद्ध और ऊर्जा संकट भी रहा। Strait of Hormuz में तनाव और नाकेबंदी के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। लावरोव ने कहा कि रूस चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि मॉस्को न केवल चीन बल्कि अन्य देशों के लिए भी संसाधनों की कमी को पूरा कर सकता है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित कई देशों के नेता लगातार बीजिंग पहुंच रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि चीन इस वैश्विक संकट में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

 

इन बैठकों में मिडिल ईस्ट संकट, वैश्विक स्थिरता और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति Xi Jinping ने खुद को एक “स्थिर और जिम्मेदार शक्ति” के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने यूएई के क्राउन प्रिंस से मुलाकात में कहा कि चीन मिडिल ईस्ट में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में “रचनात्मक भूमिका” निभाएगा। वहीं स्पेन के प्रधानमंत्री से बातचीत में उन्होंने दुनिया को “अराजकता और उथल-पुथल” के दौर में बताया और सहयोग बढ़ाने की अपील की।
 

 

 

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