Buddha Purnima 2026: ये है भगवान बुद्ध के संदेश और विशेष पूजा विधि का संपूर्ण मार्गदर्शन

Edited By Updated: 30 Apr, 2026 04:21 PM

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Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जानें भगवान बुद्ध के अष्टमार्ग (Ashtamarga), उनकी दिव्य शिक्षाएं और श्री विष्णु के नौवें अवतार की विशेष पूजा विधि। वैशाख पूर्णिमा पर स्नान, दान और पीपल पूजन का महत्व समझें।

Buddha Purnima 2026: वैशाख मास की पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी पावन तिथि को भगवान बुद्ध का जन्म और महानिर्वाण हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महात्मा बुद्ध को भगवान श्री हरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। बौद्ध धर्म की शिक्षाएं मुख्य रूप से आत्मा की शुद्धता और दुखों से मुक्ति पर केंद्रित हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे भगवान बुद्ध के बताए 'अष्टमार्ग' जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और इस दिन किस विशेष विधि से पूजा-अर्चना कर अक्षय पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।

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बौद्ध धर्म विश्व के प्राचीन धर्मों में से एक है। बौद्ध धर्म की सभी शिक्षाएं आत्मा की शुद्धता से संबंधित हैं। महात्मा बुद्ध की शिक्षा के चार मौलिक सिद्धांत है : संसार दुखों का घर है, दुख का कारण वासनाएं हैं, वासनाओं को मारने से दुख दूर होते हैं, वासनाओं को मारने के लिए मानव को अष्टमार्ग अपनाना चाहिए। अष्टमार्ग यानी, शुद्ध ज्ञान, शुद्ध संकल्प, शुद्ध वार्तालाप, शुद्ध कर्म, शुद्ध आचरण, शुद्ध प्रयत्न, शुद्ध स्मृति और शुद्ध समाधि।

भगवान बुद्ध का धर्म प्रचार 40 वर्षों तक चलता रहा। अंत में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में पावापुरी नामक स्थान पर 80 वर्ष की अवस्था में ई.पू. 483 में वैशाख की पूर्णिमा के दिन ही महानिर्वाण प्राप्त हुआ।

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Special Worship Ritual for the Ninth Avatar of Lord Vishnu भगवान विष्णु के नौवें अवतार की विशेष पूजा विधि: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान बुद्ध को श्री हरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।

Special Steps of the Buddha Purnima Puja बुद्ध पूर्णिमा पूजा के विशेष चरण:
स्नान और शुद्धता: सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या शुद्ध जल से स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।

पीपल पूजन: घर के समीप किसी पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और वहां दीपक जलाएं।

अर्पण: भगवान बुद्ध को सफेद और पीले रंग के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मंत्र जाप: पीपल के नीचे बैठकर "ॐ मणि पद्मे हूं" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

चंद्र दर्शन: पूजा के पश्चात एक पात्र में जल और फूल लेकर चंद्रमा की ओर उछालकर उन्हें अर्घ्य दें।

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