Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 Apr, 2026 08:08 AM

पिछले दिनों सिख्स फॉर जस्टिस (एस.एफ.जे.) के आह्वान पर कनाडा में खालिस्तान समर्थकों द्वारा की गई रैलियों ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गर्म कर दिया है। ये प्रदर्शन खासकर ब्रैम्पटन में त्रिवेणी मंदिर और सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के...
वेंकूवर (सरबजीत सिंह बनूड़): पिछले दिनों सिख्स फॉर जस्टिस (एस.एफ.जे.) के आह्वान पर कनाडा में खालिस्तान समर्थकों द्वारा की गई रैलियों ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गर्म कर दिया है। ये प्रदर्शन खासकर ब्रैम्पटन में त्रिवेणी मंदिर और सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर हुए, जहां खालिस्तान के झंडे लहराए गए और “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए गए।
इस मौके पर इकट्ठा हुए खालिस्तान समर्थक सिखों ने भारत विरोधी नारे भी लगाए, जिससे माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। एस.एफ.जे. का कहना है कि ये रैलियां भारत की “हिंदुत्व विचारधारा” और कनाडा में उससे जुड़े संगठनों द्वारा सिख समुदाय के खिलाफ चलाए जा रहे कथित गलत जानकारी वाले कैंपेन का जवाब हैं। संगठन का दावा है कि खालिस्तान की मांग एक पॉलिटिकल आइडिया है, जिसे आतंकवाद के तौर पर पेश करना गलत है।
खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आरोप लगाया कि कनाडा में कुछ हिंदू संगठन सिखों के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये रैलियां कनाडा के कानूनी दायरे और बोलने की आज़ादी के तहत हो रही हैं। उन्होंने इंडो-कैनेडियन हिंदू संगठनों को कड़ा मैसेज देते हुए कहा कि कनाडा के प्रति वफादार रहो या देश छोड़ दो। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन कनाडा में भारत सरकार की पॉलिसी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंदिर एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा भारतीय अधिकारियों को सम्मानित करने के मामले भी सामने आए हैं, जिसके विरोध में ये प्रदर्शन किए गए। दूसरी ओर, इन दावों से लोकल हिंदू समुदाय में भी गुस्सा है। रैलियों को देखते हुए, किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए कनाडाई सुरक्षा एजैंसियों ने दोनों जगहों पर कड़ी निगरानी रखी थी।