Edited By Sarita Thapa,Updated: 18 Oct, 2026 03:12 PM

सनातन धर्म में दशहरा यानी विजयादशमी का बहुत खास महत्व है। यह त्योहार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके अधर्म पर धर्म पर विजय का संदेश दिया था।
Dussehra 2026 Mistakes to Avoid : सनातन धर्म में दशहरा यानी विजयादशमी का बहुत खास महत्व है। यह त्योहार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके अधर्म पर धर्म पर विजय का संदेश दिया था। वहीं, मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार करके बुराई पर अच्छाई की जीत स्थापित की थी। इसी वजह से दशहरे को विजय, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और लोग अपने जीवन में सुख-समृद्धि तथा सफलता की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए, ताकि त्योहार की पवित्रता और सकारात्मकता बनी रहे। आइए जानते हैं कि विजयादशमी के दिन किन 5 कामों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
किसी के साथ झगड़ा या विवाद न करें
दशहरा प्रेम, सद्भाव और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाला पर्व है। ऐसे में इस दिन किसी के साथ बेवजह बहस करना, अपशब्द बोलना या विवाद बढ़ाना उचित नहीं माना जाता। धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से यह दिन अपने मन में अच्छे विचार रखने और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव अपनाने का अवसर है। कोशिश करें कि इस दिन परिवार और आसपास के लोगों के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करें।
किसी का अपमान करने से बचें
विजयादशमी के दिन अहंकार और नकारात्मकता को त्यागने की प्रेरणा दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में अहंकार को पतन का कारण माना गया है। इसलिए इस दिन किसी व्यक्ति का अपमान करना, उसे नीचा दिखाना या उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत माना जाता है। रावण के चरित्र से जुड़ी कथाएं भी यह संदेश देती हैं कि ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद अहंकार व्यक्ति के विनाश का कारण बन सकता है।
तामसिक भोजन और नशे से दूरी रखें
कई परिवारों में दशहरे के दिन सात्विक भोजन करने और पूजा-पाठ के दौरान संयम बनाए रखने की परंपरा है। ऐसे में मांस-मदिरा और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी जाती है, खासकर यदि आप व्रत रख रहे हों या धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हों। सात्विक भोजन को शुद्धता और अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, खान-पान से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
पूजा-पाठ में लापरवाही न करें
दशहरे के दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अपने इष्ट देव की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। कई लोग इस दिन शस्त्र पूजन, वाहन पूजन और व्यापार से जुड़े उपकरणों की पूजा भी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। जल्दबाजी में पूजा करने के बजाय अपनी परंपरा के अनुसार विधि-विधान से आराधना करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
जरूरतमंदों की मदद करने से पीछे न हटें
दशहरा केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों को अपनाने की प्रेरणा देने वाला पर्व भी है। इस दिन किसी जरूरतमंद की सहायता करने, भूखे व्यक्ति को भोजन कराने या गरीबों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने का महत्व माना जाता है। इसलिए किसी जरूरतमंद को निराश करने या सहायता करने की क्षमता होने पर भी जानबूझकर उसकी परेशानी को अनदेखा करने से बचें। छोटी-सी मदद भी किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है।
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