Edited By Prachi Sharma,Updated: 06 Mar, 2026 01:24 PM
Friday Remedy : हिंदू धर्म शास्त्रों में शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि शुक्रवार के दिन विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता का नाश कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। इस दिन...
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Friday Remedy : हिंदू धर्म शास्त्रों में शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि शुक्रवार के दिन विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता का नाश कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें से श्री कनकधारा स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारिक माना जाता है।
श्री कनकधारा स्तोत्रम्
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।
मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।
बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।
कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।
प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।
मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।
दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।
दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।
इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।
दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।
गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।
श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।
शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।
नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।
नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।
सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।
त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।
यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।
संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।
सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।
दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।
अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया:।।

कनकधारा स्तोत्र पाठ के लाभ
आर्थिक तंगी से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज या व्यापार में घाटे से जूझ रहे हैं, तो नियमित रूप से कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से धन के नए मार्ग खुलते हैं।
दरिद्रता का नाश: यह स्तोत्र नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य को दूर करता है। यह साधक के जीवन से अभाव को मिटाकर ऐश्वर्य की ओर ले जाता है।
सुख-समृद्धि में वृद्धि: घर में सुख, शांति और स्थिरता बनी रहती है। पारिवारिक कलह समाप्त होते हैं और घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
पापों से मुक्ति: ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र का शुद्ध मन से पाठ करने पर व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पापों का शमन होता है, जिससे बाधाएं दूर होती हैं।
मान-सम्मान में वृद्धि: माता लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति को समाज में मान-प्रतिष्ठा और पद की प्राप्ति होती है।

पाठ के दौरान ध्यान रखने योग्य 2 विशेष बातें
शुद्धता और पवित्रता
शारीरिक शुद्धि: पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) या सूर्यास्त का समय सबसे उत्तम है। स्नान के बाद स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करें।
मानसिक शुद्धि: केवल मंत्रों का उच्चारण ही पर्याप्त नहीं है; पाठ के दौरान आपका मन और हृदय पूर्णतः भक्ति भाव से भरा होना चाहिए। मन में कोई छल या द्वेष रखकर किया गया पाठ निष्फल हो सकता है। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और संभव हो तो कमल का फूल अर्पित करें।