Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Mar, 2026 12:56 PM

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 : हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद अपना व्रत पूर्ण करते हैं। धार्मिक शास्त्रों और पंचांग की गणना के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन फलदायी होता है जब चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय हो रहा हो। तो आइए जानते हैं भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 के शुभ मुहूर्त और महत्व है।
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Shubh Muhurat भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
भगवान गणेश को समर्पित भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस साल 6 मार्च 2026 को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन का विशेष महत्व है। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का प्रारंभ 6 मार्च 2026 को शाम 07 बजकर 53 मिनट से होगा और इस तिथि का समापन 7 मार्च 2026 को शाम 07 बजकर 17 मिनट पर होगा। चूंकि संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि का होना अनिवार्य है, इसलिए यह व्रत 6 मार्च को ही मान्य होगा। शास्त्रों के अनुसार, यदि चतुर्थी तिथि दो दिनों तक व्याप्त हो, तो जिस रात चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सके, उसी दिन व्रत रखना श्रेष्ठ होता है। 6 मार्च 2026 को रात 09 बजकर 31 मिनट चंद्रमा उदित होगा। भक्त इसी समय भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा कर अपना व्रत पूर्ण कर सकेंगे।

Significance of Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी महत्व 2026
सनातन धर्म में भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं और उनकी कृपा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत सबसे उत्तम माना जाता है।
मान्यता है कि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से न केवल आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि संतान सुख और परिवार में शांति भी आती है। जो लोग मानसिक तनाव या कार्यों में रुकावट का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत वरदान माना जाता है।

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