Masik Durgashtmi : किस दिन रखा जाएगा मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 05:10 PM

masik durgashtmi

हिंदू धर्म में मां दुर्गा की उपासना के लिए मासिक दुर्गाष्टमी का दिन अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है। हर माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व, शक्ति की भक्ति और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक है।

Masik Durgashtmi : हिंदू धर्म में मां दुर्गा की उपासना के लिए मासिक दुर्गाष्टमी का दिन अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है। हर माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व, शक्ति की भक्ति और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक है। फरवरी 2026 में यह पावन अवसर 24 फरवरी को आ रहा है, जो भक्तों के लिए मां भगवती का आशीर्वाद पाने का एक सुनहरा मौका है। ऐसी मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। तो आइए जानते हैं मासिक दुर्गाष्टमी के शुभ मुहुर्त और पूजा विधि के बारे में-

Masik Durgashtmi

मासिक दुर्गाष्टमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 24 फरवरी को प्रातः 7 बजकर 01 मिनट से होने जा रहा है, जिसका समापन अगले दिन 25 फरवरी को सुबह 4 बजकर 51मिनट पर होगा। शास्त्रों में उदयातिथि के महत्व को देखते हुए, मासिक दुर्गाष्टमी का उपवास 24 फरवरी को ही किया जाएगा। 

मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर जैसे अत्याचारी राक्षस का वध करने के लिए अवतार लिया था। माना जाता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से हर महीने की अष्टमी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन से भय, शत्रु और बाधाएं दूर हो जाती हैं। मां दुर्गा उन्हें सुख, सौभाग्य और मानसिक शक्ति का आशीर्वाद देती हैं।

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मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि 
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
मंदिर की सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से शुद्ध करें।
मां के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और यदि संभव हो तो एक तांबे के लोटे में जल भरकर कलश स्थापित करें।
मां दुर्गा को लाल चुनरी, फल, फूल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
दुर्गा चालीसा का पाठ करें या मां के प्रभावशाली मंत्र 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जाप करें और मां को हलवा, पूरी या खीर का भोग लगाएं।
अंत में कपूर जलाकर मां दुर्गा की आरती करें और अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

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