Edited By Prachi Sharma,Updated: 25 Feb, 2026 02:10 PM

Holashtak 2026 : भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में होलाष्टक को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना गया है। इस दौरान सभी नौ ग्रह अपने उग्र स्वभाव में होते हैं, जिससे मानवीय जीवन में मानसिक अशांति, कार्यों में बाधा और स्वास्थ्य संबंधी...
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Holashtak 2026 : भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में होलाष्टक को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना गया है। इस दौरान सभी नौ ग्रह अपने उग्र स्वभाव में होते हैं, जिससे मानवीय जीवन में मानसिक अशांति, कार्यों में बाधा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित करने और नवग्रहों की कृपा प्राप्त करने के लिए श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ रामबाण माना गया है। आइए, विस्तार से जानते हैं होलाष्टक के महत्व, ग्रहों की उग्रता और इस दिव्य स्तोत्र के लाभों के बारे में।
ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः। विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे रविः ॥1॥
रोहिणीशः सुधांशुश्च सुधागात्रः सुधाशनः। विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे विधुः ॥2॥
भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत्सदा। वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीड़ां हरतु मे कुजः ॥3॥
उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः। सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीड़ां हरतु मे बुधः ॥4॥
देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः। अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीड़ां हरतु मे गुरुः ॥5॥
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः। प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगुः ॥6॥
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः। प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगुः ॥6॥
अनेक रूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः। उत्पातरूपो जगतां पीड़ां हरतु मे तमः ॥8॥
महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः। अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीड़ां हरतु मे शिखी ॥9॥

नौ ग्रहों का जीवन पर प्रभाव और शांति के उपाय
शनि और राहु की शांति: यदि आप पर साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, तो शनिवार को काले तिल का दान करें और स्तोत्र का पाठ बढ़ा दें।
सूर्य और मंगल की शांति: क्रोध पर नियंत्रण रखें और रविवार को लाल वस्तुओं का दान करें।
बृहस्पति की कृपा: चने की दाल और केसर का तिलक लगाएं। इससे भाग्य में आने वाली बाधाएं दूर होंगी।
