Edited By Niyati Bhandari,Updated: 22 Apr, 2026 02:43 PM

Ganga Saptami Ke Upay: गंगा सप्तमी पर मां गंगा की आराधना से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि ज्योतिषीय और वास्तु उपायों से विवाह बाधा और आर्थिक तंगी भी दूर होती है। जानें गंगाजल के विशेष वास्तु प्रयोग और मंत्र।
Ganga Jayanti 2026: भारतवर्ष में गंगा सप्तमी का पर्व 'गंगा जयंती' के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इसी पावन तिथि को मां गंगा की उत्पत्ति हुई थी। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी देवी के रूप में पूजनीय हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई आराधना पूरे कुल का उद्धार कर सकती है और पूर्व जन्म के कर्मों के बंधन से मुक्ति दिलाती है।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
मां गंगा का जल न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र है, बल्कि इसमें प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन और औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इसके जल से स्नान करने पर मानसिक शांति प्राप्त होती है और कुंडली के ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव भी शांत होते हैं।

सुख-समृद्धि के लिए गंगा सप्तमी के विशेष उपाय
कुंभ स्थापना: गंगा सप्तमी के दिन घर की पूर्व दिशा में एक लोटे (स्टील, चांदी या मिट्टी) में गंगाजल भरकर स्थापित करें। उस पर तिलक लगाएं, अक्षत, फल, पुष्प और रक्षा सूत्र अर्पित कर मां गंगा का ध्यान करें।
उत्तर दिशा का चमत्कार: पूजन के बाद इस कुंभ को घर की उत्तर दिशा में चावल की ढेरी के ऊपर रखें। अगले दिन इस जल का पूरे घर में छिड़काव करें और शेष जल से स्नान कर लें।
आर्थिक लाभ के लिए: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर दिशा में अधिक मात्रा में गंगाजल स्टोर करके रखने से धन लाभ के योग बनते हैं।

विवाह और मानसिक शांति के लिए अचूक टोटके
शीघ्र विवाह के लिए: यदि विवाह में बाधा आ रही है, तो गंगाजल में सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते रहें।
तनाव से मुक्ति: जो लोग मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं, उन्हें नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
घर की शांति: नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए घर की छत पर गंगा जल का छिड़काव करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सिद्ध मंत्र जिनका करें जाप
पूजन के समय मां गंगा के इस दिव्य मंत्र का जाप करें: ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा
स्नान करते समय इस मंत्र का स्मरण करें: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु
