Edited By Niyati Bhandari,Updated: 03 Apr, 2026 08:03 AM

Jesus Christ Life Story: प्रभु यीशु मसीह ने सच्चाई और न्याय के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। आज से लगभग 2025 वर्ष पहले इजराइल के बैतलहम नगर में उनका जन्म पवित्र आत्मा द्वारा कुंवारी मरियम की कोख से हुआ। उनके जन्म का उद्देश्य मानव जाति को पाप और...
Jesus Christ Life Story: प्रभु यीशु मसीह ने सच्चाई और न्याय के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। आज से लगभग 2025 वर्ष पहले इजराइल के बैतलहम नगर में उनका जन्म पवित्र आत्मा द्वारा कुंवारी मरियम की कोख से हुआ। उनके जन्म का उद्देश्य मानव जाति को पाप और बुराई से मुक्त करना था। परमेश्वर ने मनुष्य के उद्धार के लिए अपने पुत्र को संसार में भेजा क्योंकि मनुष्य को उसी के समान रूप में आकर ही बचाया जा सकता था।

पवित्र बाइबल के अनुसार यीशु मसीह आदि से ही विद्यमान थे। इसके संबंध में पवित्र बाईबल में लिखा है, ‘‘आदि में शब्द था, और शब्द परमेश्वर के संग था, और शब्द ही परमेश्वर था (यूहन्ना 1:1-4)।’’
यही वचन देहधारी होकर यीशु मसीह के रूप में संसार में प्रकट हुआ। इस प्रकार वह केवल एक मनुष्य ही नहीं, बल्कि परमेश्वर का जीवित स्वरूप माने जाते हैं।
यीशु मसीह लगभग साढ़े 33 वर्ष तक इस संसार में रहे। लगभग 30 वर्ष उन्होंने अपने माता-पिता की सेवा में बिताए। इसके पश्चात उन्होंने लगभग साढ़े 3 वर्षों तक लोगों के बीच रहकर परमेश्वर का संदेश सुनाया।

उन्होंने लोगों को पश्चाताप करने, प्रेम करने और सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। उन्होंने किसी नए धर्म की स्थापना नहीं की, बल्कि मानवता की सेवा को ही सच्चा धर्म बताया- भूखे को भोजन, नंगे को वस्त्र और बीमारों की सेवा करना।
उन्होंने अपने उपदेशों में प्रेम और क्षमा पर विशेष बल दिया। उन्होंने सिखाया कि मनुष्य को अपने पड़ोसी ही नहीं, बल्कि अपने शत्रुओं से भी प्रेम करना चाहिए।
सलीब पर भी उन्होंने अपने अत्याचारियों के लिए प्रार्थना करते हुए कहा, ‘‘हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।’’ यह उनकी करुणा और महानता का अद्वितीय उदाहरण है।

उन्होंने सच्चाई और प्रेम का मार्ग दिखाया, फिर भी उस समय के धार्मिक नेताओं और शासकों ने उनसे भयभीत होकर उनके विरुद्ध षड्यंत्र रचा।
निर्दोष होने के बावजूद उन्हें सलीब पर चढ़ाने की सजा दी गई। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया- उन्हें कोड़े मारे गए, कांटों का मुकुट पहनाया गया और उनके हाथ-पैरों में कीलें ठोंकी गईं। फिर भी उन्होंने कोई विरोध नहीं किया और शांतिपूर्वक सब सहन किया।
प्रभु यीशु मसीह 6 घंटे सलीब पर रहे और बाद में ‘पूरा हुआ’ अर्थात जिस मकसद के लिए वह मनुष्य रूप में संसार में आए थे, वह पूरा हुआ, कह कर अपनी जान दे दी। आज भी मसीही समुदाय गुड फ्राइडे के दिन उनके इस महान बलिदान को श्रद्धा के साथ स्मरण करता है। यह दिन सिखाता है कि सच्चा जीवन प्रेम, करुणा और क्षमा में ही निहित है।
