Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती व्रत कथा पढ़ने से मिलती है बजरंगबली की कृपा, जानें जन्म कथा और महत्व

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 09:48 AM

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Hanuman Jayanti 2026: हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और हनुमान जी की व्रत कथा पढ़ने...

Hanuman Jayanti 2026: हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और हनुमान जी की व्रत कथा पढ़ने से जीवन के सभी कष्ट, बाधाएं और दुख दूर हो जाते हैं तथा सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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हनुमान जी के जन्म की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता अंजना एक अप्सरा थीं, जिन्हें श्राप के कारण पृथ्वी पर वानर रूप में जन्म लेना पड़ा। श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की।

उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। उसी समय अयोध्या के राजा राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ कर रहे थे, जिससे प्राप्त दिव्य प्रसाद का एक अंश पवन देव की कृपा से माता अंजना तक पहुंचा। इस प्रसाद के प्रभाव से चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ। पवन देव के कारण ही उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है।

जब हनुमान जी ने सूर्य को समझ लिया फल
हनुमान जी के बाल्यकाल की यह कथा अत्यंत प्रसिद्ध है। एक बार भूख लगने पर उन्होंने आकाश में चमकते सूर्य को फल समझ लिया और उसे खाने के लिए उड़ पड़े।

देवराज इंद्र देव ने उन्हें रोकने के लिए वज्र से प्रहार किया, जिससे वे मूर्छित हो गए। इससे क्रोधित होकर पवन देव ने संपूर्ण सृष्टि की वायु रोक दी। तब सभी देवताओं ने मिलकर हनुमान जी को जीवित किया और उन्हें असीम शक्तियों का वरदान दिया। ब्रह्मा जी ने उन्हें अजेय और दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया, जिसके कारण वे ‘बजरंगबली’ कहलाए।

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हनुमान जयंती पर व्रत कथा पढ़ने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत कथा पढ़ने और हनुमान जी की पूजा करने से—
जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
शनि दोष और मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।
नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।

भक्ति भाव से किया गया स्मरण व्यक्ति को भय, रोग और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।

हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन व्रत, पूजा और कथा का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और संकटों से मुक्ति मिलती है।

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