क्या आपका ईगो आपको छोटा बना रहा है तो सिकंदर की इस कहानी सीखें, हर हाल में मुस्कुराने का हुनर

Edited By Updated: 15 Mar, 2026 03:07 PM

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विश्व विजेता सिकंदर का सेनापति अपनी बहादुरी और ईमानदारी के लिए जाना जाता था। सेनापति से सिकंदर बहुत खुश रहते थे। एक बार सिकंदर ने सेनापति की छोटी-सी गलती से नाराज होकर उसे पद से हटा कर सूबेदार बना दिया।

Inspirational Story : विश्व विजेता सिकंदर का सेनापति अपनी बहादुरी और ईमानदारी के लिए जाना जाता था। सेनापति से सिकंदर बहुत खुश रहते थे। एक बार सिकंदर ने सेनापति की छोटी-सी गलती से नाराज होकर उसे पद से हटा कर सूबेदार बना दिया। छोटा पद पाकर भी सेनापति ने कोई नाराजगी नहीं दिखाई। सिकंदर के निर्णय को खुश होकर स्वीकार कर लिया। सूबेदार के छोटे पद पर भी उसने हमेशा की तरह अपनी निष्ठा और राज्य के प्रति समर्पण में कमी नहीं आने दी।

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कुछ समय बाद सूबेदार सिकंदर के सामने पेश हुआ तो सिकंदर ने पूछा, "तुम सेनापति से सूबेदार बना दिए गए, लेकिन तुम पहले जैसे ही संतुष्ट और उत्साहित हो, ऐसा क्यों?"

सूबेदार ने कहा, "राजन! मैं तो हर हाल में संतुष्ट रहता हूं। जब मैं सेनापति था तब सब छोटे अधिकारी मुझसे डरा करते थे, पर अब वे सब मुझसे प्यार करते हैं और मुझसे सलाह लेते हैं। मेरा मानना है कि सही अर्थों में उनकी सेवा का अवसर मुझे अब मिला है।"

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सिकन्दर ने सवाल किया, "जब तुम सेनापति के पद से हटाए गए तो अपमानित महसूस नहीं किया?" 

सूबेदार बोला, "मेरे विचार में सम्मान पद में नहीं, मानवता में है। ऊंचा पद पाकर कोई अहंकारी हो जाए और दूसरों को सताए, वह तो गलत है। दूसरों की सेवा करने, ईमानदार होने और विनम्र रहने में ही सम्मान है। ऐसा होने पर ही वह सुखी और संतुष्ट रह सकता है चाहे वह सेनापति हो या सूबेदार या सैनिक।" सिकंदर सूबेदार के जवाब से बहुत प्रभावित हुआ। उसने सूबेदार को फिर से सेनापति नियुक्त कर दिया।

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