Edited By Sarita Thapa,Updated: 05 Jun, 2026 10:40 AM

हिंदू धर्म प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व है। यह दिन देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत शुभ और विशेष माना जाता है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है।
June Shukra Pradosh Vrat 2026 : हिंदू धर्म प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व है। यह दिन देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत शुभ और विशेष माना जाता है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से शिव जी और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में आने वाली हर परेशानी दूर हो जाती है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। इस दिन महादेव की पूजा करने के साथ उनके मंत्रों और नामों का जाप करने से वैवाहिक जीवन में खुशहली और मधुरता बनी रहती है। तो आइए जानते हैं जून में पड़ने वाले प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
शुक्र प्रदोष व्रत कब है ?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगी और इसका समापन 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा। ऐसे में जून का पहला प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय की जाती है। ऐसे में 12 जून को प्रदोष काल शाम को 07 बजकर 36 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस समय में शिव जी की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।

शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
फिर घर के मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।
अब एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद भगवान शिव को जल, दूध, शहद, गंगाजल, बेलपत्र और सफेद पुष्प और माता पार्वती को सोलह श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
फिर शिव जी और माता पार्वती का ध्यान करते हुए उनके नामों और मंत्रों का जाप करें।
अंत में शिव जी और माता पार्वती के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें।

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