Edited By Niyati Bhandari,Updated: 02 May, 2026 12:59 PM

Jyeshtha Month 2026 Adhik Maas Calendar: साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना 2 महीने का होगा। जानें अधिकमास, निर्जला एकादशी, शनि जयंती और गंगा दशहरा की सही तिथियां। देखें ज्येष्ठ 2026 के व्रत-त्योहारों की पूरी सूची।
Jyeshtha Month 2026 Adhik Maas Calendar: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास (जेठ) का विशेष महत्व है, लेकिन वर्ष 2026 का ज्येष्ठ महीना बेहद खास और दुर्लभ होने वाला है। इस साल भक्तों को भक्ति और शक्ति की उपासना के लिए 30 नहीं बल्कि पूरे 60 दिन मिलेंगे। पंचांग गणना के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ मास के दौरान ही अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास लगने जा रहा है, जिससे इस महीने की अवधि दोगुनी हो जाएगी।

3 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अधिकमास हर 3 साल में एक बार आता है। 2 मई 2026 से शुरू होकर ज्येष्ठ मास 29 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान हर तिथि दो बार आएगी, जिससे व्रत-त्योहारों की झड़ी लग जाएगी। 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास का प्रभाव रहेगा, जिसमें दान-पुण्य का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
अधिकमास-ज्येष्ठ मास का महत्व: आज से ज्येष्ठ यानी जेठ मास का आरंभ होगा। यह मास भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी जी के प्रिय महीनों में से एक है। ज्येष्ठ मास के बारे में शास्त्रों में भी बताया गया है। ज्येष्ठ मास में लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले सभी दिन लक्ष्मी जी की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जिन लोगों के जीवन में धन संबंधी कोई भी परेशानी है, उन्हें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में लक्ष्मी जी की पूजा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। ज्येष्ठ मास के इन 60 दिनों में विशेष रूप से जल दान और वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए।
Jyeshtha Month Adhik Maas Vrat Tyohar ज्येष्ठ मास 2026 व्रत-त्योहार लिस्ट

2 मई: ज्येष्ठ मास का शुभारंभ।
5 मई: संकष्टी चतुर्थी व्रत
13 मई: अचला/अपरा एकादशी
16 मई: शनि जयंती और वट सावित्री व्रत
17 मई: अधिक मास प्रारंभ
25 मई: नौतपा शुरू
26 मई: गंगा दशहरा
27 मई: पुरुषोत्तम एकादशी
2 जून: नौतपा समाप्त
11 जून: पुरुषोत्तमी एकादशी (दूसरी)
15 जून: सोमवती अमावस्या का शुभ योग
16 जून: शुद्ध ज्येष्ठ मास का पुनः प्रारंभ
24 जून: मां गायत्री प्रकटोत्सव
25 जून: निर्जला एकादशी-भीमसेनी एकादशी
29 जून: वट सावित्री व्रत समापन, ज्येष्ठ पूर्णिमा और संत कबीर जयंती
