Edited By Ramkesh,Updated: 02 May, 2026 03:07 PM

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है, एक ही झटके में कमर्शियल सिलेंडर के रेट में 993 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है जबकि 5 किलो वाला सिलेंडर 261रुपए महंगा हो गया है।
नेशनल डेस्क: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है, एक ही झटके में कमर्शियल सिलेंडर के रेट में 993 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है जबकि 5 किलो वाला सिलेंडर 261रुपए महंगा हो गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके बाद होटल और रेस्टोरंट संचलाकों की टेंशन बढ़ गई है। यहां तक कि होटल एसोसिएशन ने हड़ताल की चेतावनी दी है। अब आम जनता चिंता में है कि घरेलू गैस के दाम भी बढ़ाए जा सके हैं। आखिर क्यों बढ़ते हैं ईंधन के दाम और इसके पीछे क्या कारण होते हैं आइए समझते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
भारत अपनी गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। LPG का आयात करीब 55%–60% विदेशों से मंगाता है। जरुत के हिसाब से उत्तपादन कम मात्रा में होता है। देश में LPG मांग तेजी से बढ़ रही है। घरेलू गैस भंडार सीमित हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ता है।
वैश्विक तनाव और युद्ध
मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों में तनाव, जैसे ईरान-इजरायल या अन्य भू-राजनीतिक घटनाएं, तेल सप्लाई को प्रभावित करती हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और देश में ईंधन महंगा हो जाता है।
डॉलर-रुपया विनिमय दर
कच्चा तेल डॉलर में खरीदा जाता है। अगर रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है, तो तेल आयात महंगा पड़ता है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
टैक्स का बड़ा हिस्सा
पेट्रोल और डीजल की कीमत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (एक्साइज ड्यूटी और वैट) का बड़ा योगदान होता है। कई बार अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने के बावजूद टैक्स के कारण कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं। तेल को रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक पहुंचाने में भी लागत आती है। इसमें परिवहन, स्टोरेज और डीलर कमीशन शामिल होता है, जो अंतिम कीमत को प्रभावित करता है।
मांग और सप्लाई का संतुलन
देश में ईंधन की मांग बढ़ने या सप्लाई घटने पर भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी जाती है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती हैं। जब ये सभी कारण एक साथ असर डालते हैं, तो आम लोगों को महंगे ईंधन का सामना करना पड़ता है। सरकारें समय-समय पर टैक्स और नीतियों में बदलाव कर राहत देने की कोशिश करती हैं, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं होता।