Kashi Vishwanath Vedic Clock : काशी विश्वनाथ में वैदिक घड़ी का शंखनाद, अब महादेव की नगरी में मिलेगी मुहूर्त और नक्षत्रों की सटीक जानकारी

Edited By Updated: 05 Apr, 2026 01:28 PM

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बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के बाद, अब बाबा विश्वनाथ के दरबार में भी समय की गणना भारतीय पद्धति से होगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने काशी यात्रा के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को यह विशेष विक्रमदित्य वैदिक घड़ी उपहार स्वरूप भेंट की...

Kashi Vishwanath Vedic Clock : बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के बाद, अब बाबा विश्वनाथ के दरबार में भी समय की गणना भारतीय पद्धति से होगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने काशी यात्रा के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को यह विशेष विक्रमदित्य वैदिक घड़ी उपहार स्वरूप भेंट की है। इस घड़ी के लगने से अब मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और विद्वानों को न केवल समय, बल्कि भारतीय पंचांग की गहरी जानकारियां भी एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।

क्या है इस वैदिक घड़ी की खासियत?
यह साधारण घड़ी नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक और प्राचीन वैदिक विज्ञान का एक अनूठा संगम है। यह घड़ी सूर्योदय से सूर्योदय के चक्र पर आधारित है। इसमें एक दिन को 24 घंटों के बजाय 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है। इस डिजिटल घड़ी के माध्यम से श्रद्धालु तिथि, नक्षत्र, योग, करण और भद्रा जैसी ज्योतिषीय गणनाओं को आसानी से देख सकेंगे। शुभ कार्य, व्रत और त्योहारों के लिए जरूरी 'शुभ मुहूर्त' की जानकारी अब मंदिर परिसर में ही उपलब्ध होगी। वैदिक समय के साथ-साथ यह भारतीय मानक समय (IST) और ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) की जानकारी भी प्रदान करती है।

उज्जैन से काशी तक का आध्यात्मिक जुड़ाव
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों को इस प्राचीन काल-गणना पद्धति से जोड़ना है। उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहली घड़ी के उद्घाटन के बाद, काशी विश्वनाथ मंदिर इस श्रृंखला का दूसरा प्रमुख केंद्र बना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि यह घड़ी हमारी आने वाली पीढ़ी को भारतीय विज्ञान और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने का एक माध्यम बनेगी।

भक्तों और पुजारियों के लिए सुगमता
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस घड़ी की स्थापना से पुजारियों को दैनिक अनुष्ठान और आरती के समय के निर्धारण में अत्यधिक सटीकता मिलेगी। साथ ही, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु जो पंचांग देखना नहीं जानते, वे भी इस डिजिटल स्क्रीन के जरिए पर्व और त्योहारों की सटीक स्थिति जान पाएंगे।

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