Edited By Sarita Thapa,Updated: 08 Mar, 2026 09:19 AM

केदारनाथ धाम की पवित्रता और वहां की संवेदनशील पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। हिमालय की गोद में बसे इस पावन धाम में अब कूड़े के ढेर नजर नहीं आएंगे, क्योंकि सरकार ने हाईटेक मशीनों के जरिए Waste Management का एक...
Kedarnath Temple News : केदारनाथ धाम की पवित्रता और वहां की संवेदनशील पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। हिमालय की गोद में बसे इस पावन धाम में अब कूड़े के ढेर नजर नहीं आएंगे, क्योंकि सरकार ने हाईटेक मशीनों के जरिए Waste Management का एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार कर लिया है।
केदारनाथ धाम: तकनीक से संवरेगा स्वच्छता का स्वरूप
हर साल लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण केदारनाथ में प्लास्टिक और अन्य कचरे का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। अब इसका समाधान अत्याधुनिक मशीनों के जरिए निकाला जा रहा है।
केदारनाथ धाम का मास्टर प्लान
केदारनाथ और पैदल मार्ग के मुख्य पड़ावों पर ऐसी मशीनें लगाई जा रही हैं जो कचरे को उसके प्रकार के आधार पर तुरंत अलग-अलग कर देंगी। कूड़े के आयतन को कम करने के लिए कॉम्पैक्टर मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कचरे को आसानी से नीचे लाकर रिसाइकिल किया जा सके। कचरे के डिब्बों और सफाई कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए डिजिटल तकनीक और QR कोड सिस्टम का सहारा लिया जाएगा।
केदारनाथ की बदलती सूरत
इस मास्टर प्लान का उद्देश्य केदारनाथ धाम को 'जीरो वेस्ट ज़ोन' बनाना है। यानी जितना कचरा वहां पैदा होगा, उसका वहीं या सुरक्षित तरीके से निस्तारण कर दिया जाएगा। मशीनों के उपयोग से कूड़े को जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे वहां की शुद्ध हवा और ग्लेशियर्स पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्थानीय रोजगार और जागरूकता
इस योजना में स्थानीय युवाओं को मशीनों के संचालन और कचरा संग्रहण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही, श्रद्धालुओं को भी 'कचरा मुक्त केदारनाथ' अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि वे स्वयं भी गंदगी न फैलाएं।
क्यों जरूरी था यह कदम ?
11,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में पारंपरिक तरीके से कचरा हटाना बेहद कठिन काम है। घोड़ों और खच्चरों पर लादकर सारा कूड़ा नीचे लाना व्यवहारिक नहीं था। अब हाईटेक मशीनों की मदद से कूड़े को जैविक खाद या रिसाइकिल योग्य सामग्री में बदलने से पर्यावरण को बड़ी राहत मिलेगी।
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