Edited By Prachi Sharma,Updated: 28 Feb, 2026 12:32 PM

Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड में चल रही बद्रीनाथ कॉरिडोर परियोजना के साथ अब पर्यावरणीय पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हिमालयी क्षेत्र की नाजुक भौगोलिक संरचना और पहले जोशीमठ में सामने आ चुकी भू-धंसाव की घटनाओं को देखते हुए परियोजना...
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Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड में चल रही बद्रीनाथ कॉरिडोर परियोजना के साथ अब पर्यावरणीय पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हिमालयी क्षेत्र की नाजुक भौगोलिक संरचना और पहले जोशीमठ में सामने आ चुकी भू-धंसाव की घटनाओं को देखते हुए परियोजना के निर्माण कार्यों की वैज्ञानिक समीक्षा शुरू की गई है।
देहरादून में आयोजित एक प्रस्तुति के दौरान भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान (आईआईआरएस) के विशेषज्ञों ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन के सामने अपनी अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि भारी मशीनों का उपयोग और गहरी खुदाई पहाड़ी ढलानों की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी की जाए और क्षेत्र की वहन क्षमता का सही आकलन अनिवार्य रूप से किया जाए।
विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि बद्रीनाथ जाने का प्रमुख मार्ग जोशीमठ से होकर गुजरता है, जो पहले भू-धंसाव की समस्या का सामना कर चुका है। ऐसे में बड़े पैमाने पर निर्माण और बढ़ती यातायात गतिविधियों का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण और तकनीकी परीक्षण को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। जहां भी वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता होगी, उसे लागू किया जाएगा और निर्णय तथ्यों के आधार पर लिए जाएंगे।
इसी बीच अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठकों का सिलसिला जारी रहा। केंद्रीय कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने टिहरी गढ़वाल में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन सहित कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। साथ ही उन्होंने राजभवन में राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) से भेंट कर राज्य के विकास और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा चुकी है, उन्हें निर्धारित समयसीमा में पूरा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पहाड़ी इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देकर दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
बद्रीनाथ कॉरिडोर परियोजना का मकसद धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है। इसके तहत बद्रीनाथ धाम को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं और अधिक सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सकेगा।
इस प्रकार राज्य सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दे रही है।