Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Feb, 2026 10:32 AM

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भगवान जगन्नाथ के प्रति अगाध श्रद्धा जगजाहिर है। हाल ही में अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने न केवल दर्शन किए, बल्कि पुरी के विश्व प्रसिद्ध महाप्रसाद का आनंद भी लिया, जिसे पाकर वे भाव-विभोर हो गईं।
Droupadi Murmu Jagannath Dham Visit : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भगवान जगन्नाथ के प्रति अगाध श्रद्धा जगजाहिर है। हाल ही में अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने न केवल दर्शन किए, बल्कि पुरी के विश्व प्रसिद्ध महाप्रसाद का आनंद भी लिया, जिसे पाकर वे भाव-विभोर हो गईं। जगन्नाथ धाम में राष्ट्रपति और उनके साथ मौजूद अन्य विशिष्ट अतिथियों के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई थी।
राष्ट्रपति ने ओड़िशा के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। विशेष रूप से कनिका और बेसर के स्वाद ने उनका मन मोह लिया। उन्होंने इसे अमृत तुल्य बताते हुए इसकी सात्विकता की सराहना की। देश की प्रथम नागरिक होने के बावजूद, राष्ट्रपति मुर्मू ने जमीन पर बैठकर बेहद सादगी के साथ प्रसाद ग्रहण किया। यह दृश्य वहां मौजूद हर भक्त के लिए प्रेरणादायक था। उन्होंने इस बात पर भी अचंभित होकर खुशी जताई कि कैसे भगवान की रसोई में बिना किसी आधुनिक उपकरण के, मिट्टी के बर्तनों में इतना स्वादिष्ट और शुद्ध भोजन तैयार किया जाता है।
जमशेदपुर में भी गूंजा जगन्नाथ नाम
सिर्फ पुरी ही नहीं, राष्ट्रपति मुर्मू ने 26 फरवरी 2026 को जमशेदपुर में भी भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी भक्ति दिखाई। उन्होंने वहां ₹100 करोड़ की लागत से बनने वाले भव्य जगन्नाथ मंदिर का 'भूमि पूजन' किया। उन्होंने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं, जिनकी कृपा बिना किसी भेदभाव के हर इंसान पर बरसती है।
महाप्रसाद से जुड़ी कुछ खास बातें
प्रसाद में ओड़िशा की प्रसिद्ध 'दालमा' (सब्जियों वाली दाल) को भी विशेष स्थान दिया गया था।
जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है, जहां प्रतिदिन 56 प्रकार के भोग तैयार होते हैं।
इस प्रसाद को ग्रहण करते समय कोई छोटा-बड़ा नहीं होता, यह सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
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