Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Feb, 2026 11:03 AM

वाराणसी के यातायात इतिहास में जून 2026 एक बड़ी क्रांति लेकर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट Kashi Ropeway का काम अब अपने अंतिम चरण में है।
Kashi Vishwanath Dham Ropeway Project : वाराणसी के यातायात इतिहास में जून 2026 एक बड़ी क्रांति लेकर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट Kashi Ropeway का काम अब अपने अंतिम चरण में है। यह न केवल बनारस, बल्कि भारत की पहली पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे सेवा होगी, जो शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों के ऊपर एक उड़नखटोले की तरह चलेगी।
मिनटों में दूरी, घंटों की बचत
वर्तमान में वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया या विश्वनाथ धाम जाने में संकरी गलियों और भारी ट्रैफिक के कारण 45 से 60 मिनट लग जाते हैं। अब इस 3.8 किमी की दूरी को यात्री मात्र 15-16 मिनट में पूरा कर सकेंगे। जमीन पर ट्रैफिक जाम की चिंता किए बिना, लोग हवा में तैरते हुए सीधे बाबा के दरबार के करीब पहुंचेंगे।
शिवमय होंगे स्टेशन और आधुनिक सुविधाएं
प्रशासन इस सेवा को पूरी तरह शिवमय रंग में ढाल रहा है। रोपवे के 5 प्रमुख स्टेशन- कैंट, काशी विद्यापीठ रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया को आध्यात्मिक रंग में रंगा जा रहा है। यहां की वास्तुकला में काशी की संस्कृति की झलक दिखेगी। करीब 148-153 गोंडोला लगातार चलेंगे। हर कैबिन में 10 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। अनुमान है कि एक तरफ का किराया ₹50 से ₹100 के बीच हो सकता है, जो आम जनता और पर्यटकों के लिए काफी किफायती होगा।
सुरक्षा और तकनीक पर विशेष जोर
वाराणसी के कमिश्नर और NHLML के अधिकारियों ने जून तक काम पूरा करने की समयसीमा तय की है। यह रोपवे यूरोपीय सुरक्षा मानकों (CEN) के अनुरूप बनाया गया है, जिसमें 3-लेवल का रेस्क्यू सिस्टम भी है। स्टेशनों पर आधुनिक लॉकर रूम, वेटिंग एरिया और सुरक्षा के लिए 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी होगी। यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त परिवहन है, जो काशी की आबोहवा को भी शुद्ध रखने में मदद करेगा।
कब से उठा सकेंगे लुत्फ ?
प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए गए हैं कि जून 2026 तक हर हाल में संचालन शुरू कर दिया जाए। वर्तमान में Safety Tests और फुल-स्पीड ट्रायल रन तेजी से चल रहे हैं।
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