Edited By Rohini Oberoi,Updated: 08 Mar, 2026 11:25 AM

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है बल्कि मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve Cells) को होने वाले नुकसान के कारण पैदा हुई स्थितियों का एक समूह है। यह धीरे-धीरे इंसान की सोचने-समझने, याद रखने और बातचीत करने की शक्ति छीन लेता है। जब घर का कोई बुजुर्ग इस...
Dementia Caregiver Support Guide : डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है बल्कि मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve Cells) को होने वाले नुकसान के कारण पैदा हुई स्थितियों का एक समूह है। यह धीरे-धीरे इंसान की सोचने-समझने, याद रखने और बातचीत करने की शक्ति छीन लेता है। जब घर का कोई बुजुर्ग इस दौर से गुजरता है तो पूरा परिवार भावनात्मक और शारीरिक रूप से थकने लगता है लेकिन सही जानकारी और पूर्व तैयारी से इस सफर को आसान बनाया जा सकता है।
डिमेंशिया के तीन मुख्य चरण (Stages of Dementia)
डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी को तीन श्रेणियों में समझा जा सकता है:
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शुरुआती दौर (Early Stage): लक्षण बहुत हल्के होते हैं। मरीज हाल की बातें भूल जाता है या सामान रखकर भूल जाता है। इस समय उन्हें बस हल्की मदद और याद दिलाने की जरूरत होती है।
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मध्यम दौर (Middle Stage): याददाश्त की कमी साफ दिखने लगती है। मरीज समय, दिन या जगह को लेकर भ्रमित (Confused) हो सकता है। अपनों को पहचानने में दिक्कत आती है और रोजमर्रा के कामों के लिए किसी का साथ जरूरी हो जाता है।
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गंभीर दौर (Late Stage): यह सबसे कठिन समय है। मरीज पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाता है। बातचीत बंद हो सकती है और वे अपनी बुनियादी जरूरतें भी नहीं बता पाते।
घर पर कैसे करें तैयारी?
मरीज के लिए घर का माहौल दवा से ज्यादा असरदार होता है। इन बातों का खास ख्याल रखें:
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तय रूटीन: जागने, खाने और सोने का एक फिक्स समय रखें। इससे मरीज की घबराहट और उलझन कम होती है।
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संवाद का तरीका: उनसे चिल्लाकर बात न करें। छोटे वाक्यों का प्रयोग करें और उन्हें अपनी बात कहने के लिए पर्याप्त समय दें।
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बहस से बचें: यदि मरीज किसी ऐसी बात की जिद करे जो मुमकिन नहीं है (जैसे- कहीं दूर जाने की जिद), तो उनसे बहस न करें। उनका ध्यान किसी दूसरी पसंदीदा चीज या एक्टिविटी की ओर मोड़ दें।
परिवारों के लिए जरूरी सर्वाइवल गाइड
डिमेंशिया की देखभाल एक लंबी दौड़ है। इसके लिए व्यावहारिक तैयारी जरूरी है:
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वित्तीय योजना (Financial Planning): इलाज और भविष्य में केयरटेकर की जरूरत को देखते हुए खर्चों का आकलन पहले ही कर लें।
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कानूनी तैयारी: बीमारी गंभीर होने से पहले वसीयत या पावर ऑफ ऑटर्नी जैसे काम निपटा लेना बेहतर होता है।
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मदद लेने में न हिचकिचाएं: अकेले सब कुछ संभालना मुश्किल हो सकता है। प्रोफेशनल केयरटेकर या डे-केयर (Memory Care) सुविधाओं की मदद लें।
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खुद का ख्याल: केयरटेकर को भी ब्रेक की जरूरत होती है। अपनी मानसिक सेहत को नजरअंदाज न करें।