Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Jun, 2026 12:26 PM

रामायण में कई ऐसे प्रसंग हैं जो आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या सच में ऐसा हो पाना संभव था। उन्हीं में से एक रहस्यमयी प्रसंग जुड़ा है रावण के भाई कुंभकर्ण से।
Kumbhkaran 6 months sleep Story : रामायण में कई ऐसे प्रसंग हैं जो आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या सच में ऐसा हो पाना संभव था। उन्हीं में से एक रहस्यमयी प्रसंग जुड़ा है रावण के भाई कुंभकर्ण से। आपने अक्सर कथाओं में सुना होगा कि कुंभकर्ण 6 महीने तक सोता था और केवल एक दिन के लिए ही जागता था। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों था। आखिर कुंभकर्ण क्यों इतने लंबे समय के लिए सोता था और क्या कुंभकर्ण ने खुद 6 महीने सोने का वरदान मांगा था, या फिर यह किसी भूल, चाल या श्राप का परिणाम था। आखिर इतना शक्तिशाली योद्धा होकर भी उसे ऐसी विचित्र स्थिति का सामना क्यों करना पड़ा। तो आइए जानते हैं कुंभकर्ण के 6 महीने तक सोने के पीछे की कहानी के बारे में-
पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण का भाई कुंभकर्ण अत्यंत शक्तिशाली था। और अधिक सामर्थ्य प्राप्त करने की इच्छा से उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। जब ब्रह्मा जी कुंभकर्ण की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्होंने कुंभकर्ण को मनचाहा वर मांगने को कहा। कहा जाता है कि कुंभकर्ण का इरादा देवताओं के राजा इंद्र का पद प्राप्त करने का था। लेकिन देवगण यह भली-भांति जानते थे कि यदि इतना शक्तिशाली दैत्य इंद्र का सिंहासन पा गया, तो तीनों लोकों में भारी संकट खड़ा हो सकता है। इसी चिंता के चलते देवताओं ने देवी सरस्वती से सहायता मांगी। देवताओं की प्रार्थना सुनकर मां सरस्वती कुंभकर्ण की जिह्वा पर विराजमान हो गईं। जब वरदान मांगने का समय आया, तब उनकी माया के प्रभाव से कुंभकर्ण के मुख से “इंद्रासन” की जगह “निद्रासन” शब्द निकल गया। ब्रह्मा जी ने भी “तथास्तु” कहकर वही वरदान प्रदान कर दिया। यह देखकर रावण बेहद चिंतित हो उठा।

इतने लंबे समय तक अपने भाई को सोते हुए देखकर रावण दुखी हो गया। रावण ने ब्रह्मा जी से निवेदन किया कि हे पितामह! आपका यह वरदान मेरे भाई के लिए श्राप जैसा है, यह किसी मृत्यु से कम नहीं है। क्योंकि वह हर क्षण बस सोता रहेगा और निरंतर नींद में डूबे रहने वाला योद्धा किसी काम का नहीं रहेगा। या तो आप इस वरदान को वापस ले लीजिए, या फिर इस निर्णय में कुछ परिवर्तन करे। ब्रह्मा जी ने स्पष्ट किया कि दिया गया वरदान पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता। तब उन्होंने उसमें संशोधन करते हुए व्यवस्था बनाई कि कुंभकर्ण लगातार सोता नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय तक निद्रा में रहने के बाद सीमित अवधि के लिए जाग सकेगा। उन्होंने कहा कि कुंभकर्ण छह महीने तक गहरी नींद में रहेगा और फिर एक दिन के लिए जागेगा। जागने के दौरान उसे अत्यधिक भूख लगेगी, जिसके बाद वह भरपेट भोजन करके दोबारा निद्रा में चला जाएगा। इसके साथ ही एक और विशेष शर्त भी जुड़ी थी। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय पूरा होने से पहले उसे जबरन जगाने का प्रयास किया गया, तो उसका परिणाम उसके लिए विनाशकारी साबित हो सकता है और युद्धभूमि में उसका अंत निश्चित माना जाएगा।

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